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UP: दूध पर निर्भर बिजनौर की भवानी, भोजन करने लगी मेरठ की चंडी, सीएम योगी ने किया था नामकरण

Sat, 15 Oct 2022 06:49 PM IST
मेरठ ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बिजनौर

सार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर चिड़ियाघर में नामकरण किया तो भवानी और चंडी प्रदेश भर में चर्चाओं में आ गई। अब बिजनौर की भवानी दूध पर निर्भर है तो वहीं मेरठ की चंडी भोजन करने लगी है।
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गोरखपुर के चिड़िया घर में बिजनौर की भवानी। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर चिड़ियाघर में जिन गुलदार के मादा शावकों का नामकरण किया, वह मेरठ और बिजनौर से गए थे। जिस शावक का नाम चंडी रखा गया है, वह मेरठ के जंगलों में मां से बिछड़ गई थी, वहीं भवानी बिजनौर के चांदपुर क्षेत्र से मिली थी। मुख्यमंत्री ने नामकरण किया तो दोनों प्रदेश भर में चर्चाओं में आ गई। चिड़ियाघर में चंडी अपना स्वाभाविक भोजन (मीट) करने लगी है, वहीं भवानी अभी भी दूध पर ही निर्भर है।

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एक सप्ताह पहले गोरखपुर चिड़ियाघर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चंडी और भवानी का नामकरण किया तो इसकी चर्चा प्रदेश भर में होने लगी। बिजनौर डीएफओ डॉ.अनिल पटेल ने चिड़ियाघर प्रशासन से बिजनौर से भेजी गई गुलदार की शावक भवानी का हाल जाना तो पता चला कि वह अभी भी दूध पर ही निर्भर है। वह अब तीन माह की हो चुकी है। वह चांदपुर के लोदीपुर मिलक में 11 जून को एक और शावक के साथ मिली थी। दोनों को गोरखपुर भेजा गया था, लेकिन इनमें से एक की मौत हो गई थी। जो बची, उसी का नाम भवानी रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने भवानी को हाल ही में बोतल से दूध पिलाया था। उसका वजन अभी साढ़े तीन किलो ही है। उधर मेरठ से भेजी गई चंडी का विकास एकदम प्राकृतिक तरीके से हो रहा है। साढ़े पांच माह की चंडी का वजन भी करीब 13 किलो हो चुका है और वह अपने प्राकृतिक भोजन मीट को खाने लगी है। चंडी इसी वर्ष दो अप्रैल को मेरठ के किठौर क्षेत्र में भगवानपुर बांगर गांव के जंगल में मिली थी। उस समय वह करीब 20 दिन की थी।
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मां के दूध का दिख रहा असर
चिड़ियाघर के अफसरों ने बिजनौर डीएफओ को बताया कि दोनों शावकों के विकास में बहुत अंतर है। असल में यह मां के दूध का असर है। जो मेरठ से गुलदार का शावक भेजा गया, उसने करीब 20 दिन मां का दूध पिया था। इसलिए उसके विकास पर कोई असर नहीं आया और वह स्वाभाविक तरीके से बढ़ रही है। वहीं दूसरी ओर बिजनौर से भेजी गई भवानी ने करीब एक सप्ताह ही मां का दूध पिया था। इसलिए उसका विकास धीमी गति से हो रहा है।

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भवानी और उसकी बहन को छोड़कर चली गई थी मां
डीएफओ बिजनौर डॉ. अनिल पटेल ने बताया कि चांदपुर के लोदीपुर मिलक के जंगल में ग्रामीणों को तीन शावक मिले थे। वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों को अलग रहने के लिए कहा तो मादा गुलदार एक शावक को साथ ले गई। गन्ने का खेत दूर था, इसलिए वह बाकी दोनों शावकों को लेने नहीं लौटी थी। वन विभाग ने मौके पर दोनों शावकों के लिए दूध रखवाकर तीन दिन इंतजार किया था, लेकिन उनकी मां नहीं लौटी। इसके बाद दोनों शावकों को गोरखपुर चिड़ियाघर भेजा गया। इनमें से एक का नाम भवानी रखा गया है।
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