मां के दूध का दिख रहा असर
चिड़ियाघर के अफसरों ने बिजनौर डीएफओ को बताया कि दोनों शावकों के विकास में बहुत अंतर है। असल में यह मां के दूध का असर है। जो मेरठ से गुलदार का शावक भेजा गया, उसने करीब 20 दिन मां का दूध पिया था। इसलिए उसके विकास पर कोई असर नहीं आया और वह स्वाभाविक तरीके से बढ़ रही है। वहीं दूसरी ओर बिजनौर से भेजी गई भवानी ने करीब एक सप्ताह ही मां का दूध पिया था। इसलिए उसका विकास धीमी गति से हो रहा है।
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भवानी और उसकी बहन को छोड़कर चली गई थी मां
डीएफओ बिजनौर डॉ. अनिल पटेल ने बताया कि चांदपुर के लोदीपुर मिलक के जंगल में ग्रामीणों को तीन शावक मिले थे। वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों को अलग रहने के लिए कहा तो मादा गुलदार एक शावक को साथ ले गई। गन्ने का खेत दूर था, इसलिए वह बाकी दोनों शावकों को लेने नहीं लौटी थी। वन विभाग ने मौके पर दोनों शावकों के लिए दूध रखवाकर तीन दिन इंतजार किया था, लेकिन उनकी मां नहीं लौटी। इसके बाद दोनों शावकों को गोरखपुर चिड़ियाघर भेजा गया। इनमें से एक का नाम भवानी रखा गया है।