बिजनौर। जिले में जिला पंचायत, बीडीसी एवं ब्लॉक प्रमुख पद के लिए आरक्षण घोषित हो चुका है, लेकिन अभी तक विकास खंडों में बीडीसी वार्डों के संबंध में आरक्षण की सूची चस्पा नहीं की गई।
दिनभर बीडीसी सदस्य पद के दावेदार अपने वार्ड की स्थिति का पता लगाने के लिए विकास भवन के चक्कर लगाते रहे। उधर बीडीसी सदस्य पद पर महिलाओं के लिए 483 सीटें आरक्षित की गई हैं।
छह सितंबर को बीडीसी, जिला पंचायत और प्रमुख पद के लिए आरक्षण की सूची घोषित की गई। विकास भवन में रविवार की सायं जिला पंचायत सदस्य पद एवं ब्लॉक प्रमुख पद की सूची चस्पा की गई, लेकिन बीडीसी सदस्य पद की सूची का अभी तक कोई अता पता नहीं है।
यह सूची सभी विकास खंड कार्यालयों पर लगाई जानी थी। बीडीसी सदस्य पद के दावेदार दिन भर विकास भवन में सूची लेने के लिए दौड़ धूप करते रहे, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। कंभौर निवासी राजपाल सिंह के अनुसार बीडीसी सदस्य पद की सूची चस्पा नहीं होने से ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उधर डीपीआरओ कार्यालय के अनुसार जिले में 1415 बीडीसी वार्ड है, एससी वर्ग के लिए 361 में से 124 सीटे महिलाओं के लिए आरक्षित है। इसी तरह से ओबीसी वर्ग के लिए 377 में से 129 सीटे महिला वर्ग एवं सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित 676 सीटों में से महिला वर्ग के लिए 229 सीटो आरक्षित हुई है। डीपीआरओ कार्यालय का दावा है कि ब्लॉक कार्यालयों में बीडीसी पद के लिए आरक्षण की सूची चस्पा हुई है।
शुरू हुआ सियासी बैठकों का दौर
बिजनौर। जिला पंचायत एवं ब्लॉक प्रमुख पद पर आरक्षण घोषित होते ही सियासी चौपालों का दौर शुरू हो गया है। बड़े नेताओं की नजर जिला पंचायत अध्यक्ष एवं ब्लॉक प्रमुख पद की कुर्सी पर है। जिले व ब्लॉकों में अपनी सत्ता कायम करने के लिए सियासी गोटियां फिट की जा रही है। सोमवार को दिन भर आरक्षण के साथ ही सियासी खिचड़ी पकती रही। राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच गोपनीय बैठकों का दौर भी चला।
आरक्षण की बुनियाद पर सपनों की इमारत
बिजनौर। राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को कई सीटों पर आरक्षण के हथियार से भी शिकस्त दी है। सपा, बसपा, भाजपा, कांग्रेस व रालोद नेता जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में पूरी तैयारी से जुट गये हैं।
दिसंबर में होंगे प्रधान पद के चुनाव
बिजनौर। प्रधान पद के चुनाव दिसंबर में होंगे। जिला पंचायत के चुनाव पहले होने से प्रधान पद के दावेदारों का खर्च बढ़ गया है। काफी समय पहले से प्रधान पद के दावेदार चुनाव की तैयारी में लगे हुए थे। प्रधान पद के चुनाव पीछे हटने से अब दावेदारों की दिक्कते बढ़ गई है, जबकि प्रधानों को इससे राहत मिली है।