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Bijnor News: बाढ़ नियंत्रण को तैयार किए गए कालागढ़, दिल्ली और हरिद्वार के बैराज

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कालागढ़ से दिल्ली, बिजनौर, हरिद्वार व गाजियाबाद में नदियों पर बने बांध व बैराज के गेट बाढ़ नियं
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बिजनौर गंगा बैराज समेत कई बैराजों के अनुरक्षण का हुआ काम
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सैंडिल बांध के गेटों पर कराया पेंट, शेरकोट के खो बैराज पर लगवाई गईं मोटर
संवाद न्यूज एजेंसी

कालागढ़। सिंचाई विभाग कालागढ़ के रामगंगा बांध, सैंडिल बांध से लेकर दिल्ली, बिजनौर, हरिद्वार और गाजियाबाद में नदियों पर बने बैराज के गेट बाढ़ नियंत्रण के लिए तैयार किए गए हैं। गेटों को नियंत्रित करने में आने वाली परेशानियों को दूर कर इनका संचालन आसान बनाया गया है। कालागढ़ के सैंडिल बांध के गेटों पर लंबे समय के बाद पेंट और शेरकोट के खो बैराज पर गेटों के संचालन के लिए 54 साल के बाद मोटर लगाने का काम अंतिम चरण में है।

कालागढ़ के केंद्रीय भंडार खंड तीन के अंतर्गत कालागढ़ के रामगंगा बांध, सैंडिल बांध, अफजलगढ़ बैराज, पीली बांध, हरेवली बैराज, खो बैराज, बिजनौर में मध्य गंगा बैराज, हरिद्वार में बांध और भीम गोड़ा बैराज, गाजियाबाद में हिंडन बैराज, नई दिल्ली में ओखला बैराज और रामपुर में कमौली बैराज के यांत्रिक कार्यों और रखरखाव का काम किया जा रहा है। कालागढ़ में सैंडिल बांध पर लंबे समय के बाद तीन गेटों की सुरक्षा के लिए पेंट आदि और शेरकोट के खो बैराज पर गेटों के संचालन के लिए 12 गेटों पर मोटर लगाई जा रही हैं। अभी तक गेट उठाने के लिए बड़ी संख्या में श्रमिक लगाने पड़ते थे। अनेक बार गेट उठाने में समय लगने पर जलाशय में पानी की मात्रा बढ़ जाती थी। बैराज के निर्माण के 54 वर्ष के बाद पहली बार सिंचाई विभाग आधुनिकीकरण का काम कर रहा है।
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बाढ़ से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी, बैराज तैयार होने का दावा
कालागढ़ के केंद्रीय भंडार खंड तीन के ईई मनोज गौड़ का कहना है कि कालागढ़ के रामगंगा और सैंडिल बांध, हरिद्वार, बिजनौर, गाजियाबाद और नई दिल्ली के बैराज से बड़ी मात्रा में पानी की निकासी की जाती है। सभी बैराज बाढ़ नियंत्रण के लिए तैयार किए जा चुके हैं। लगातार अनुरक्षण निगरानी की जा रही है। उच्च अधिकारी स्वयं दौरा कर वास्तविक स्थिति से परिचित हैं। उनसे मिलने वाले निर्देशों का पालन किया जा रहा है।
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सैंडिल बांध का 26 और खो का 40 लाख का बजट
ईई मनोज गौड़ का कहना है कि सैंडिल बांध पर गेटों पर पेंटिंग पर 26 लाख और शेरकोट के खो बैराज पर 40 लाख रुपये का खर्च किया गया है। दोनों ही स्थान बाढ़ नियंत्रण में विशेष भूमिका निभाते हैं। दोनों में ही काफी पानी बरसात में आता है। कालागढ़ के रामगंगा बांध से पहले सैंडिल बांध से ही बाढ़ का पानी नदी में छोड़ा जाता है। वहीं कोटद्वार से आने वाले पानी को शेरकोट से नदी में छोड़ा जाता है।
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