बिजनौर। जिले की बरकातपुर चीनी मिल इस पेराई सत्र में चीनी कम बनाएगी। गन्ने के रस से बी हैवी मोलाइसिस शीरा बनाकर उससे एथनॉल बनाया जाएगा। इससे मिल में चीनी का उत्पादन दस प्रतिशत तक कम होगा। चीनी का उत्पादन कम होने से बाजार में इसके दाम बढ़ेंगे और किसानों को समय से भुगतान मिलेगा।
गन्ने और चीनी का बंपर उत्पादन चीनी मिल, सरकार और किसान तीनों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। बंपर उत्पादन से चीनी के दाम दो साल की अपेक्षा कम है। ऐसे में चीनी मिलों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। चीनी मिल मालिक किसानों को समय से भुगतान नहीं करा पा रहे हैं। यह स्थिति तब है जब चीनी की कीमत बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी का न्यूनतम दाम 3100 रुपये प्रति क्विंटल घोषित कर रखा है। साथ ही मिलों का चीनी का प्रतिमाह का बिक्री कोटा भी निर्धारित कर रखा है। इससे स्थिति सुधरी तो है, लेकिन चीनी मिलें अब भी लाभ की स्थिति में नहीं हैं। इससे चीनी मिल समय से गन्ना भुगतान भी नहीं कर पा रही हैं। गन्ने की फसल को चीनी से अलग उत्पादों से जोड़कर बी हैवी मोइलाइसिस से एथनॉल बनाने के लिए चीनी मिलों को कहा जा रहा है। पिछले साल जिले की धामपुर चीनी मिल ने बी हैवी मोलाइसिस से एथनॉल बनाया था। मिल ने 15 प्रतिशत चीनी कम बनाई थी। इस बार बरकातपुर चीनी मिल गन्ने के रस से चीनी का उत्पादन कम करके एथनॉल बनाएगी। गन्ने के रस से बी हैवी मोलाइसिस शीरा बनाया जाएगा। इससे सीधे एथनॉल बनाया जाएगा। इससे मिल में बनने वाली करीब डेढ़ लाख क्विंटल चीनी नहीं बनेगी। चीनी का उत्पादन कम होने से बाजार में चीनी के दाम उछलेंगे।
ऐसे बनता है बी हैवी मोलाइसिस
गन्ने से चीनी के अलावा शीरा, खोई आदि सामान बनता है। बी हैवी भी शीरे की एक ग्रेड होती है। बरकातपुर चीनी मिल के क्वालिटी हैड अखिलेश प्रताप के अनुसार गन्ने में पाए जाने वाले सुक्रोज से चीनी बनती है। एक क्विंटल गन्ने में करीब 13 किलोग्राम व चार लीटर शीरा बनता है। सुक्रोज को चीनी बनाने में प्रयोग करने के बजाए सीधा शीरे में छोड़ दिया जाता है। अगर डेढ़ प्रतिशत सुक्रोज को शीरे में छोड़ा जाए तो ऐसा करने पर छह से सात लीटर शीरा बनता है। इससे बनने वाले शीरे को बी हैवी मोलाइसिस कहते हैं। बी हैवी मोलाइसिस से एथनॉल बनाया जाता है।
उच्च श्रेणी का ईंधन है एथनॉल
एथनॉल एक उच्च श्रेणी का ईंधन होता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर प्रयोग में लाया जाता है। केंद्र व प्रदेश सरकार इसका उत्पादन बढ़ाकर चीनी का उत्पादन कम करने पर जोर दे रही हैं।
बनाई थी 14 लाख क्विंटल चीनी
पिछले साल बरकातपुर चीनी मिल ने 1.13 करोड़ क्विंटल गन्ने की पेराई करके 14.08 लाख क्विंटल चीनी बनाई थी। मिल की औसत रिकवरी 12.52 प्रतिशत रही थी। अगर इतने ही गन्ने से पेराई में डेढ़ प्रतिशत सुक्रोज को शीरे में छोड़ दिया जाए तो चीनी का उत्पादन 12.41 लाख क्विंटल होगा। चीनी का उत्पादन दस प्रतिशत तक कम होगा।
बी हैवी से बना शीरा 59 रुपये लीटर
सामान्य शीरे से बनने वाले एथनॉल का दाम 45 रुपये प्रति लीटर है, जबकि बी हैवी से बनने वाले शीरे का दाम 54 रुपये प्रति क्विंटल है। एक क्विंटल गन्ने में छह से सात किलो तक बी हैवी मोलाइसिस बनाया जा सकता है।
चीनी की खपत व मूल्य बढ़ाने की चुनौती
वर्तमान में सबसे बड़ी समस्या चीनी की खपत व उसका मूल्य बढ़ाने की है। अगर हम खपत नहीं बढ़ा सकते हैं तो चीनी का उत्पादन कम करके दाम बढ़ाने का विकल्प बचता है। इसी सोच के साथ बी हैवी मोलाइसिस वाले शीरे से एथनॉल बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
मिल गई मंजूरी
बरकातपुर चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक विश्वास राय के मुताबिक चीनी मिल को बी हैवी मोलाइसिस से एथनॉल बनाने की अनुमति मिल गई है। चीनी उत्पादन से हो रहे नुकसान को इससे कम किया जाएगा। मिल के पास पहले से ही साढ़े छह लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक है।
बढ़ेगा चीनी का बाजार
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह का कहना है कि बी हैवी मोलाइसिस से एथनॉल बनाकर चीनी मिलों की आमदनी बढ़ेगी। इससे चीनी का बाजार मूल्य भी बढ़ेगा। बरकातपुर चीनी मिल इस साल डेढ़ प्रतिशत सुक्रोज का इस्तेमाल एथनॉल बनाने में करेगी।