- दुर्गा प्रसाद दुबे निवासी कानपुर ने साथियों के साथ बनाई थी कंपनी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एमपी सिंह ने चिटफंड कंपनी बनाकर करोड़ों की धोखाधड़ी करने के आरोपी कंपनी के मालिक दुर्गा प्रसाद दुबे सहित विशंबर नाथ दुबे, अमित मिश्रा, आलोक त्रिपाठी की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।
थाना मंडावली के गांव कामगारपुर निवासी सत्यपाल सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि दुर्गा प्रसाद दुबे निवासी कानपुर ने अपने साथियों के साथ एक चिटफंड कंपनी बनाई। जिसमें दुर्गा प्रसाद एमडी थे। इस कंपनी में जिला बिजनौर व अन्य स्थानों पर अपने कार्यालय खोले। एजेंटों के खाते खोलकर उनका धन ऐंठा। फिर उनके माध्यम से जनता को गुमराह करके और अपने संबंध एसबीआई, पीएनबी, एचडीएफसी आदि बैंक से बताकर जनता से करोड़ों रुपये का धन इकट्ठा किया। बिजनौर में भी सत्यपाल सहित ओमप्रकाश, संजीव कुमार आदि तमाम एजेंटों से लाखों रुपया लिया एवं धन दोगुना करने का लालच देकर जनता से करोड़ों रुपये एफडी और आरडी के नाम से इकट्ठा किया। समय पूरा होने पर कंपनी अपना कार्यालय बंद करके भाग गई। जब उन्होंने धन वापस करने को कहा, तब उन्हें धमकी दी गई कि तुम्हारा रुपया वापस नहीं करेंगे। करीब पांच करोड़ रुपये बिजनौर से धोखाधड़ी कर हड़पे गए हैं।
इस मामले में अपने आदेश में अदालत ने कहा है कि करोड़ों रुपयेे की हेराफेरी का कंपनी के मालिक व अधिकारियों पर आरोप है कि इनके खिलाफ अन्य हिस्सों में भी 11 मामले धोखाधड़ी के दर्ज हैं। इन्हें जमानत पर छोड़ा जाना उचित नहीं है। इनका अपराध गंभीर है। अपराध की गंभीरता को देखते हुए इनकी जमानत याचिका निरस्त की जाती है।