बिजनौर में स्पेशल जज आलोक पाराशर ने सर्व यूपी ग्रामीण बैंक की खासपुरा शाखा के सस्पेंशन एकाउंट से एक करोड़ 39 लाख की धनराशि को अनाधिकृत रूप से अन्य खातों में स्थानांतरित करने के आरोपी बैंक मैनेजर नरेंद्र कुमार की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।
इस सनसनी खेज घोटाले की रिपोर्ट सर्व यूपी ग्रामीण बैंक की तैमूरपुर शाखा के मैनेजर सुशील कुमार ने दर्ज कराई। रिपोर्ट में कहा गया था कि 11 सितंबर 2015 को उनकी शाखा के खाता धारक शाहनु के खाते से दस लाख की धनराशि चैक द्वारा सिद्धार्थ निवासी पमड़ावली द्वारा निकाली गई थी।
सिद्धार्थ द्वारा फोन करके 14 सितंबर को शाहनु के खाते से 15 लाख के चैक का भुगतान देने के लिए कहा गया तो उन्हें शक हुआ। जब उन्होंने कंप्यूटर सिस्टम से जानकारी की तो पता चला कि सर्व यूपी ग्रामीण बैंक की खासपुरा शाखा से चरथावल ब्रांच में अमित कुमार के खाते में 90 लाख रुपये तथा तिमरपुर शाखा में शाहनुकुमार के खाते में 25 लाख रुपये तथा शशांक के खाते में 24 लाख रुपये जमा किया गया।
जब उन्होंने खासपुरा शाखा से बात की तो उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई धनराशि सस्पेंशन एकाउन्ट से स्थानांतरित नहीं की है। तुरंत क्षेत्रीय कार्यालय को एक करोड़ 39 लाख की धोखाधड़ी की इस घटना के बारे में सूचित किया गया। इस मामले में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि एक करोड़ 39 लाख की धनराशि खासपुरा शाखा के प्रबंधक नरेंद्र कुमार के द्वारा ही स्थानांतरित की गई है।
इस मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई के समय शासकीय अधिवक्ता पंकज चौहान ने कहा कि जिस कंप्यूटर से सस्पेंशन एकाउंट की यह धनराशि स्थानांतरित की गई है उसके पासवर्ड की जानकारी सिर्फ शाखा प्रबंधक नरेंद्र कुमार को ही थी और बिना उनकी मिली भगत के यह धनराशि स्थानांतरित नहीं हो सकती।
कोर्ट ने इस मामले में एक करोड़ 39 लाख की धनराशि अनाधिकृत रूप से अन्य खातों में स्थानांतरित करने के आरोपी खासपुरा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक नरेंद्र कुमार की जमानत याचिका निरस्त कर दी है। इस मामले का मास्टर माइंड सिद्धार्थ एवं उसका साथी अमित कुमार अभी फरार है। शशांक की जमानत हाई कोर्ट से हो चुकी है।