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दर्शन नहीं कर पाए तो घर में ही स्थापित किए बद्री विशाल

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दर्शन नहीं कर पाए तो घर में ही स्थापित किए बद्री विशाल
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कोतवाली देहात। 16 जून 2013 को उत्तराखंड के केदारनाथ में आई भीषण आपदा में फंसकर एक हफ्ते तक जिंदगी और मौत से संघर्ष करने के बाद भी एक व्यक्ति केदारनाथ के दर्शन नहीं कर सका। तो उसने अपने घर में ही भगवान बद्री विशाल को स्थापित कर लिया। तब से उनकी प्रतिदिन पूजा अर्चना करते हैं। यह कहानी है कोतवाली देहात के खंड विकास कार्यालय में कार्यरत शिव प्रकाश की।
कोतवाली देहात के खंड विकास कार्यालय में कार्यरत शिव प्रकाश जब 2013 की आपदा में बद्री विशाल के दर्शन नहीं कर पाए, तब उन्होंने अपने हाथों से लकड़ी से बद्रीनाथ मंदिर की आकृति बनाकर उसमें बद्री प्रभु को प्रतिष्ठित कर दिया। वह प्रतिदिन घर में स्थापित बद्री विशाल के दर्शन करते हैं। शिवप्रकाश मूल रूप से गढ़वाल के भटौली गांव के रहने वाले हैं। 16 जून 2013 को वह परिवार सहित बद्रीनाथ की यात्रा के लिए गए थे। वह पांडुकेश्वर तक ही पहुंच पाए थे कि पता चला कि आगे तेज वर्षा के कारण सड़क टूट गई है तथा बद्रीनाथ मंदिर का मार्ग अवरुद्ध हो गया है। वह गाड़ी से वहीं उतर गए। तेज बारिश के कारण उन्हें एक घर में शरण लेनी पड़ी।
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तीन दिन तक वह वहीं फंसे रहे। भारी बारिश के कारण वह अपनी आंखों से विनाश की लीला देखते रहे। कई मकान उनके सामने नदी की तेज धार में बह गए। बारिश रुकने पर वह परिवार सहित आईटीबीपी के सैनिकों की मदद से वहां से निकल पाए। वह करीब 25 किलोमीटर पैदल चले। 2013 में बद्रीनाथ के दर्शन न कर पाने का उन्हें बेहद मलाल था। इसके बाद उन्होंने अपने हाथ से मंदिर की आकृति का निर्माण करना शुरू किया। उन्होंने लकड़ी से चार फीट ऊंची तथा चार फीट लंबी मंदिर की आकृति बनाई और उसमें भगवान बद्री विशाल को स्थापित किया। शिव प्रकाश द्वारा बनाई गई बद्रीनाथ मंदिर की आकृति देखने के लिए काफी लोग उनके घर पर आते हैं। शिव प्रकाश का कहना है कि वह प्रतिदिन घर में बने बद्री विशाल के दर्शन करके बद्रीनाथ धाम के दर्शन का आनंद प्राप्त करते हैं।
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