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बिजनौर: अमानगढ़ वन रेंज में सबसे शक्तिशाली है एटी-वन बाघ, अब तक ले चुका है दो बाघों की जान

Wed, 04 Nov 2020 02:16 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
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International tiger day 2020 - फोटो : pixabay
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बिजनौर के अमानगढ़ वन रेंज में एटी-वन (अमानगढ़ टाइगर वन) की दहाड़ गूंज रही है। एटी-वन अब तक अमानगढ़ में दो बाघों की जान ले चुका है। दो बाघों की जान लेकर ये उन्हें खा भी चुका है। इसे अमानगढ़ का सबसे ताकतवर बाघ माना गया है। अमानगढ़ में एटी-वन की बादशाहत कायम हो गई है। वन विभाग के अफसर व कर्मचारी भी एटी-वन को इस समय का सबसे शक्तिशाली बाघ मान रहे हैं।
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अमानगढ़ वन रेंज नौ हजार 580 हेक्टेअर जमीन में फैला है। इसकी सीमाएं झिरना, ढ़ेला, पतरामपुर व जिम कार्बेट से मिलती हैं। इस साल हुई गणना में अमानगढ़ में 24 बाघ मिले हैं। जबकि गणना होने से पहले दो बाघ जंगल में हुई झड़प में मर चुके थे। एक बाघ को हाथी ने पटक कर मारा था जबकि दूसरे बाघ को एक दूसरे बाघ ने ही मारा था।

वन विभाग के स्टाफ को अमानगढ़ की जसपुर कक्ष संख्या नौ में 14 अप्रैल को एक बाघिन का शव मिला था। बाघिन बुरी तरह घायल थी और उसके शव को खाया भी गया था। बाघिन से 20 मीटर दूर एक व्यस्क चीतल का भी शव मिला था। उसका शव करीब 80 प्रतिशत खाया हुआ था। वहां हर जगह बाघ का खून मिला था।
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वन विभाग के अफसरों को जांच में पता चला था कि एक बाघ ने ही बाघिन की जान ली है। वहां दूसरे बाघ के भी घायल होने का पता चला था। 26 अक्तूबर 2016 को भी अमानगढ़ में एक नर बाघ का शव मिला था। उसकी मौत भी दूसरे बाघ से भिड़ंत हुई थी। इसके शव को भी खाया गया था। वाटर होल के पास ये भिड़ंत हुई थी। दोनों बार बाघ की मौत के बाद मौकों पर ट्रैप कैमरे लगाए गए थे।
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ट्रैप कैमरे के सामने जो भी हलचल होती है वह उसका फोटो खींच लेता है। 2017 और 2020 में दोनों ट्रैप कैमरों में कैद बाघ के फोटो से शरीर के निशान आदि का डीएफओ डा.एम सेम्मारन ने मिलान किया गया तो दोनों फोटो एक ही बाघ के निकले। इस बाघ को एटी-वन (अमानगढ़ टाइगर वन) नाम दिया गया है।

बहुत बलशाली, प्रभावशाली और ताकतवर है एटीवन
अमानगढ़ टाइगर वन के बारे में शासन को भी रिपोर्ट प्रेषित की गई है। विभाग की रिपोर्ट में अमानगढ़ टाइगर वन को बहुत बलशाली, प्रभावशाली और ताकतवर माना गया है।

जोड़े में नहीं रहता है बाघ
बाघ और बाघिन अलग अलग रहते हैं। केवल प्रणय के समय ही बाघ और बाघिन जोड़े में रहते हैं। बाघिन एक बार में एक से छह तक शावकों को जन्म देती हैं। बाघिन ही बच्चों को अकेले पालती है और शिकार करना सिखाती है।

कुदरती तौर पर जंगल का राजा होता है बाघ
बाघ कुदरती तौर पर भी जंगल का राजा होता है। यह तीन साल में व्यस्क होता है। बाघ या बाघिन एक दूूसरे के इलाके में पहुंच जाते हैं तो इनमें खूनी संघर्ष हो जाता है। ऐसी लड़ाई में बूढ़े या भिड़ंत के कम अनुभव वाले बाघ को जान से हाथ धोना पड़ता है।

होता है बहुत शक्तिशाली
बाघ बहुत ही शक्तिशाली होता है। यह शिकार को मुंह से गला घोंटकर मारता है। कभी कभी तो बाघ के हमले में शिकार की गर्दन भी टूट जाती है। जंगल में बाघ केवल व्यस्क हाथी से ही डरता है।
डीएफओ डा.एम सेम्मारन के अनुसार 2019 में बाघ और इस साल अप्रैल में बाघिन की जान एटीवन वन ने ली है। बाघ की मौत इलाके की लड़ाई जबकि बाघिन की जान शिकार के लिए हुई लड़ाई में गई है। एटी-वन बहुत ताकतवर बाघ है।
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