शाम ढलते ही अंधेरे में डूब जाता है आधा शहर
बिजनौर। भले ही एक साल पहले पालिका दायरा बढ़ गया हो, लेकिन सुविधाओं में इजाफा नहीं हुआ। शहर की चार प्रमुख सड़कों पर अभी तक स्ट्रीट लाइटें नहीं लगी हैं। शाम ढलते ही नगीना, नजीबाबाद, मंडावर और बैराज रोड पर अंधेरा पसर जाता है। दुकानदारों को अपनी दुकानों की बाहर लाइट जलानी पड़ती है।
शक्ति चौराहे से नगीना की तरफ जाने वाली सड़क और नजीबाबाद रोड के आसपास रहने वाले लोग यूं तो कई सालों से शहरी कहे जा रहे हैं। इनके साथ ही जजी चौराहे से मंडावर रोड, बैराज रोड पर भी लगातार शहरीकरण होता गया। अब पालिका दायरा बढ़ा तो चारों सड़क चक्कर रोड चौराहे तक पालिका की सीमा में भी आ गई हैं। इन सड़कों पर चक्कर रोड तक पूरा बाजार और दुकानें है। अब शहरीकरण की सुविधाओं की बात करें तो इन सड़कों पर कहीं भी ऐसी झलक दिखाई नहीं देती। खासकर स्ट्रीट लाइट को लेकर, इन सड़कों पर अभी तक स्ट्रीट लाइट नहीं लगी है। जिस वजह से शाम ढलते ही ये सड़कें अंधेरे में डूब जाती हैं। अंधेरे मेें पैदल चलने वाले लोगों को डर लगता है।
नहीं बन सकी सीवर लाइन
बिजनौर में रेलवे लाइन के पार नए इलाकों में सीवर लाइन भी नहीं बन सकी थी। हालांकि पूरे शहर में आठ साल पहले सीवर लाइन बिछा दी गई थी। रेल लाइन के पार ज्ञान विहार, नवाब का अहाता समेत दर्जन भर कॉलोनियों में सीवर लाइन नहीं बन सकी है। उधर पुराने शहर की बात करें तो यहां सीवर लाइन बनी थी लेकिन अभी तक कनेक्शन से घर नहीं जोड़े गए हैं। जिसके लिए बजट का इंतजार है।
नये इलाकों में कच्ची हैं तमाम सड़कें
चक्कर रोड के आस पास जितने भी मोहल्ले पालिका में शामिल हुए हैं। उनमें तमाम सड़कें अभी भी कच्ची हैं। जिन पर खड़ंजा तक भी नहीं लगा है। चक्कर रोड पर कुटीया कॉलोनी के पास भी कई सड़क कच्ची हैं। भरत विहार कॉलोनी में शांति नगर के लोग भी पिछले कई महीनों से अपने यहां की सड़कों को पक्का बनवाने के लिए पालिका के चक्कर काट रहे हैं।
लोगों की जुबानी...
चक्कर चौराहे पर नहीं है एक भी लाइट
चीनी मिल के आसपास चक्कर चौराहे तक एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं लगी है। रात में अपनी दुकानों की बाहर लगी लाइटों को जलाना पड़ता है। जिससे रात के अंधेरे में चोरी की घटनाओं से दुकानों को बचाया जा सके।
- केके अग्रवाल, मेडिकल स्टोर स्वामी
अंधेरे में चोरी का रहता है डर
नगीना रोड पर शाम ढलते ही अंधेरा पसर जाता है। हालांकि दुकानदारों ने आपस में एक राय कर दुकानों की बाहर की लाइटों को जलाना शुरू किया है। वहीं सड़क पर उड़ती धूल से भी सभी परेशान रहते हैं। फाटक के पास धूल के चलते निकलना भी मुश्किल है। अंधेरे में चोरी का डर सताने लगता है।
-विभोर अग्रवाल
सड़क के नाले भी कीचड़ से अटे पड़े
चक्कर रोड पर स्ट्रीट लाइट नहीं लगी है जबकि सड़क के एक तरफ का पूरा इलाका पालिका के क्षेत्र में आता है। इस सड़क के नाले भी कीचड़ से अटे हुए हैं। बिन बरसात भी पानी की निकासी नहीं हो पाती है।
- सुजीत तोमर
अब तक गली की सड़कें हैं कच्ची
एक साल पहले तक ग्राम प्रधान से सड़क बनवाने की गुहार लगाते थे, लेकिन गली की सड़क पक्की नहीं हो सकी। अब पालिका में क्षेत्र आए तो सड़क बनने की उम्मीद जगी है। अब देखना है कि कब तक उनके घर तक आने वाली सड़क पक्की हो पाएगी।
- ब्रह्म सिंह
वर्जन...
अभी जो पैसा आया है, उसमें स्ट्रीट लाइट लगवाने का प्रावधान नहीं है। पंद्रह वित्त की दूसरी किस्त आएगी तो उससे लाइटें लगवा दी जाएंगी। नए इलाकों में सड़क बनवाने के लिए कार्य योजना में शामिल किया गया है।
-मनोज कुमार, ईओ पालिका