नहटौर-पैजनियां मार्ग का नहीं हुआ चौड़ीकरण।
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बिजनौर में नहटौर विधानसभा सुरक्षित सीट पर समस्याओं के अंबार लगे हुए र्है। इस विधानसभा क्षेत्र में किसी भी दल के जनप्रतिनिधि ने चुनाव जीतने के बाद विकास कार्यों की परवाह नहीं की। विधायकों के वादे भी जनता के वादों पर खरे नहीं उतर सके।
चुनाव संग्राम शुरू होते ही नेताओं ने अपने पुराने वादे दोहराने के लिए जनता के बीच जाने की तैयारी कर ली है। नागरिकों को मालूम है कि हर बार की तरह इस बार भी प्रत्याशी आश्वासन की घुट्टी पिलाकर संतुष्ट करने की कोशिश करेंगे। नहटौर 2012 से पहले धामपुर विधानसभा का हिस्सा रहा है। वर्ष 2012 में नए परिसीमन के तहत धामपुर , चांदपुर व नगीना विधानसभा के कुछ हिस्से को काटकर नई सुरक्षित विधानसभा बना दी गई। अब इस विधानसभा क्षेत्र में दूसरी बार चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है। नेता पहले चुनाव में किए वादे पूरे नहीं किए अब फिर से लोगों के बीच जाकर पुराने विकास व समस्याओं के पिटारे के वादे दोहराने में लग गए र्है। नहटौर कपड़े की बड़ी मंडी है। सूती कपड़े के नहटौर में कई बड़े उद्योग लगे हैं। नहटौर में विदेशों तक को कपड़ा एक्सपोर्ट होता है। सप्ताह में दो बार कपड़े का बड़ा बाजार लगता है। देश की जानी मानी उर्दू लेखिका कुरतुलेन हैदर का भी नहटौर से गहरा रिश्ता रहा है। कुरतुलेन हैदर नहटौर की रहने वाली थीं।
नहटौर विधानसभा सीट पर केवल बसपा ने विवेक कुमार और सपा ने मुन्ना लाल प्रेमी को अपना प्रत्याशी बनाया है। भाजपा , कांग्रेस समेत बाकी दलों ने अपने प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। वर्ष 2012 में इस सीट पर विधानसभा के हुए पहले चुनाव में बसपा ने कब्जा कर लिया। बसपा के ओमकुमार पहली बार चुनाव लड़कर इस सीट से विधायक बने। अब ओमकुमार ने पाला बदलकर भाजपा का दामन थाम लिया है।
ओमकुमार भाजपा से टिकट लेने की ताल ठोक रहे र्है। ओमकुमार के अलावा भी टिकट के कई दावेदार हैं।
नहटौर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 90 हजार मुस्लिम , 72 हजार दलित चुनाव का रुख पलटने का दम रखते हैं। बसपा दलितों आैर मुस्लिमों पर डोरे डाल रही है तो सपा भी इनके साथ अन्य जातियों के समीकरण साधने में जुटी है। भाजपा भी दलितों के साथ 32 हजार सैनी, 28 हजार जाट व 30 हजार चौहान को अपने पाले में लाने में लगीे है। वोटरों को अपने पाले में खींचने का खेल शुरू हो गया हैं।