मोटे अनाज का क्षेत्रफल घटा, मांग बढ़ी
बिजनौर। बदलते परिवेष में खान पान में भी बदलवा आया है। दशकों पहले अधिकांश घरों में बनने वाला मोटे अनाज की रोटी गौण हो गई हैं। जबकि मोटे अनाज का सेवन शुगर, इरिटेबल सिंड्रोम, पेट के बीमार व्यक्ति चिकित्सकों की सलाह पर कर रहे हैं। मोटे अनाज से बच्चे, बड़ों को पौष्टिक तत्व मिलते हैं। दो-तीन दशक पहले तक घर के भोजन में मोटे अनाज का खूब इस्तेमाल हुआ करता था।
जनपद में सवा दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना बुवाई, धान 55768 हेक्टेयर क्षेत्रफल, गेहूं 151765 हेक्टेयर, मक्का 49 हेक्टेयर, चना 14 हेक्टेयर, जौ तीन हेक्टेयर, ज्वार दो हेक्टेयर, बाजरा चार हेक्टेयर क्षेत्रफल में उत्पादित हो रहा है। गत वर्ष भी मोटे अनाज की बुवाई के आंकड़े करीब करीब इतने ही थे। चना, मक्का और बाजरा का क्षेत्रफल बहुत कम है। समय के बदलाव के साथ ही लोगों की खानपान की रुचि भी बदलने लगी। लोगों का रुझान फास्ट फूड की तरफ हो गया। इस कारण रसोई से मोटा अनाज गायब होने लगा। रसोई से मोटा अनाज गायब हुआ तो खेती में भी बदलाव हुआ है। वर्तमान में खाने में गेहूं, चावल का ही सबसे ज्यादा प्रयोग किया जा रहा है। पहले रोजाना खाने में चना, मक्का, बाजरा, लोबिया, सोयाबीन, जई, ज्वार आदि का प्रयोग किया जाता था, जो सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता था। जनपद में गन्ना फसल के बाद गेहूं और धान की बुवाई होती है।
जंगली जानवरों से घटा रकबा
किसान विजयपाल सिंह, ताहर सिंह का कहना है जंगली जानवरों, बेसहारा पशुओं के नुकसान होने से दलहन, मक्का, जो आदि का रकबा घटा है। पशु ऐसी फसलों को चर जाते है, जिससे उत्पादन पर असर आया।
फायदेमंद है मोटा अनाज
इरिटेबल सिंड्रोम और डायबिटीज के मरीजों के लिए मोटा अनाज फायदेमंद है। मोटा अनाज खाने के फायदे बहुत है। इसके खाने से प्यास ज्यादा लगती है, इससे व्यक्ति को कब्ज नहीं रहता है। पेट सही से साफ होता है।
- डॉ. आरएस वर्मा, फिजिशियन जिला अस्पताल।
शुगर से बचाता है मोटा अनाज
मेरे यहां जो भी शुगर के मरीज आते हैं, उन्हें मोटा अनाज अपने भोजन में शामिल करने की सलाह दी जाती है। मोटा अनाज पेट संबंधी कई समस्याओं से भी बचाता है।
- डॉ.पंकज, शुगर रोग विशेषज्ञ वरिष्ठ फिजिशियन