यूं तो भगवान श्रीकृष्ण जगत के ज्ञानी है। महाभारत में गीता का सार समझाया, लेकिन बिजनौर की एक पाठशाला में बाल रूप में लड्डूगोपाल बाकायदा ककहरा सीख रहे हैं। जी हां, गांव के बच्चों के संग हर रोज स्कूल जाते हैं। उन्हें दिया जाने वाला लंच कक्षा में प्रसाद स्वरूप वितरित किया जाता है।
गांव सिकैड़ा निवासी संदीप डबास का विवाह लगभग 10 वर्ष पहले हुआ था। उनके कोई संतान नहीं हुई तो 18 नवंबर 2019 को वृंदावन से लड्डू गोपाल को ले आए। तब से लड्डू गोपाल का पुत्र की भांति लालन-पालन कर रहे हैं।
उन्होंने लड्डू गोपाल का नर्सरी कक्षा में प्रवेश अप्रैल महीने में ग्राम बांकपुर स्थित जेपीएसडी इंटरनेशनल स्कूल में कराया। पहले तो वह प्रतिदिन लड्डू गोपाल को खुद ही स्कूल छोड़ने जाते थे। जुलाई से उन्होंने लड्डू गोपाल को विद्यालय के ट्रांसपोर्ट की गाड़ी से भेजना शुरू कर दिया है। गाड़ी में लड्डू गोपाल के सिंहासन के लिए अलग से व्यवस्था की गई है।
कक्षा में बच्चों के बीच बैठते हैं लड्डू गोपाल
जेपीएसडी इंटरनेशनल स्कूल बांकपुर की प्रधानाचार्य अर्चना गौतम बताती है कि लड्डू गोपाल को बैठने के लिए अलग से स्टूल डाला गया है। इस पर लड्डू गोपाल बच्चों के बीच ही बैठते हैं। बच्चे अपने बीच लड्डू गोपाल को बैठा हुआ देखकर खुश होते हैं और पढ़ाई में मन लगाते हैं।
लंच का रहता है इंतजार
लड्डू गोपाल प्रतिदिन लंच लेकर आते हैं। क्लास टीचर लड्डू गोपाल के लंच बॉक्स से सबसे पहले लड्डू गोपाल को भोग लगाती हैं। इसके बाद बचा हुआ लंच बच्चों में प्रसाद के रुपए वितरित हो जाता है।
700 नंबर पर दर्ज है लड्डू गोपाल का नाम
नामांकन रजिस्टर में लड्डू गोपाल का नाम 700वें नंबर पर अंकित है। प्रधानाचार्य अर्चना गौतम ने बताया कि उन्होंने संदीप डबास से फीस न देने का आग्रह किया था। मगर, वे हर महीने फीस दे रहे हैं।