बिजनौर/मंडावर में दो दिन बैंक बंद रहने के बाद सोमवार को जिला मुख्यालय पर कुछ देर के लिए उपभोक्ताओं की भीड़ उमड़ी। दोपहर होते होते भीड़ सामान्य होने लगी। वहीं मंडावर में एसबीआई शाखा में कैश न होने पर आक्रोशित उपभोक्ताओं ने बस स्टैंड के पास बिजनौर-हरिद्वार मार्ग पर जाम लगा दिया। थाना प्रभारी निरीक्षक दुर्गेश कुमार मिश्र ने भीड़ को समझाकर शांत किया।
सोमवार को इलाहाबाद बैंक के बाहर कुछ देर के लिए लाइन लगी, लेकिन बाद में सब भीड़ छंट गई। पीएनबी, एसबीआई, सर्व यूपी ग्रामीण बैंक आदि की शाखाओं में भी यही हालत देखने को मिली। एचडीएफसी बैंक के एटीएम से रुपये निकालने के लिए उपभोक्ताओं की लाइन लग गई।
मंडावर में एसबीआई शाखा से रुपये निकालने के लिए उपभोक्ता सुबह नौ बजे ही बैंक आ गए थे, लेकिन कर्मचारियों ने उनको दस बजे कैश न होने की बात बताई तो उपभोक्ता आक्रोशित हो गए। वे प्रदर्शन करते हुए रोडवेज के पास बिजनौर-हरिद्वार मार्ग पहुंचे और जाम लगा दिया। थाना प्रभारी दुर्गेश कुमार मिश्र ने उनको समझाकर करीब 15 मिनट बाद जाम खुलवाया और बैंक लेकर गए। वहां बैंक मैनेजर मनोज वाजपेयी ने बंद चैनल के अंदर से ही उनसे बात की। थाना प्रभारी ने उनको सुबह से ही कैश न होने पर एक दिन पहले नोटिस बोर्ड लगाने को कहा। उपभोक्ताओं ने एसबीआई की एटीएम मशीन दो हफ्ते से बंद पड़ी होने की शिकायत की। पीएनबी शाखा से पूरा दिन कैश मिला। इलाहाबाद बैंक के प्रबंधक आशीष गोयल के अनुसार बैंक में भीड़ कम हुई है। जो भी कैश मिल रहा है, उपभोक्ताओं को बांटा जा रहा है। उधर, जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक अजय कुमार ने ब्लॉक स्योहारा व नूरपुर में ब्लॉक लेबिल बैंकर्स की बैठक ली। उन्होंने बैंक द्वारा ऋण योजनाओं में बांटी जा रही राशि की समीक्षा की। ऋण योजनाओं में सभी पात्रों को ऋण देने के लिए कहा। सभी योजनाओं में शत प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति के निर्देश दिए। उधर, अफजलगढ़ में सोमवार को दो दिन की छुट्टी के बाद बैंक खुले। लेकिन ग्राहकों को अब भी कैश नहीं मिल पाया। नो कैश का बोर्ड टंगा होने के कारण कतार में खड़े ग्राहकों को मायूस ही लौटना पड़ा। पंजाब नेशनल बैंक में कनेक्टिविटी न होने से चार घंटे कोई काम नहीं हो पाया। इससे क्षुब्ध ग्राहकों ने बैंक के बाहर हंगामा किया। इस बैंक में करीब 4 घंटे कोई कार्य नहीं हुआ।
ग्राहक विजेंद्र सिंह, इंद्रजीत सिंह, सरजीत सिंह, मामचंद, सीताराम, प्रेम शंकर, रणवीर सिंह, अमरजीत सिंह, किशन सिंह, मलकीत सिंह आदि ने बताया कि धान और गन्ने का पैसा बैंकों में आ चुका है। लेकिन उसके बाद भी कैश न मिलने से गेहूं की बुआई, खाद, बीज की दिक्कतें हो रही हैं। पीएनबी के चार एटीएम, स्टेट बैंक का एक एटीएम, सिंडीकेट बैंक के दो एटीएम हैं। ग्राहकों का कहना है कि अभी तक किसी में भी कोई पैसा नहीं डाला गया है।
पुराने और नए नोटों के उपलब्ध ना होने से एटीएम शोपीस बने हैं। उपभोक्ता करन सिंह, याकूब, हरवंश सिंह, जोगेंद्र सिंह, सफदर खान आदि का कहना है कि लगातार कतार में लगने के बावजूद आठ से दस हजार रुपये ही निकल पाए हैं। दो माह में 10 हजार रुपये में बच्चों की फीस, राशन, रोजमर्रा के खर्चे और खेती कैसे कर पायेंगे। उधर पीएनबी के प्रबंधक रमेश सोन कुसले और स्टेट बैंक प्रबंधक हरीश कुमार शर्मा का कहना है कि ऊपर से कम पैसा आ रहा है। जैसे व्यापारियों का पैसा जमा हो रहा है वैसे ही ग्राहकों को दिया जा रहा है। ग्राहकांे की यह समस्या दूर कर दी जाएगी। इसके प्रयास जारी हैं।