बिजनौर में शीतला माता मंदिर के पास एक खेत से जुताई के दौरान एक मूर्ति मिली है। मूर्ति सैकड़ों साल पुरानी मानी जा रही है। मूर्ति भगवान ब्रह्मा या विष्णु की होने की बात कही जा रही है। मूर्ति ग्रेनाइट के पत्थर की बनी है। मूर्ति को देखने के लिए मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड़ लग रही है।
बिजनौर का प्राचीन नाम विजयनगर था। यह शीतला माता मंदिर के आसपास बसा था। गंगा की लहरों द्वारा यह क्षेत्र नष्ट कर दिया गया था। अब कई दशक से यहां पर खेती होती है। मंदिर के आसपास के खेतों में आज भी पुरानी प्राचीनकाल से जुड़ी वस्तुएं मिलती हैं। मंदिर के पास ही प्रबंधक समर सिंह का खेत है। एक-दो दिन पहले समर सिंह खेत की जुताई कर रहे थे तो टीलर जमीन में किसी वस्तु से टकराकर टूट गया। उन्होंने बाद में खोदकर देखा तो वहां से एक शिलाखंड निकला। इसे साफ किया गया तो यह हरे रंग के पत्थर पर तराशी गई एक मूर्ति निकली। मूर्ति भगवान ब्रह्मा या विष्णु की होने की बात कही जा रही है। मूर्ति का वजन एक क्विंटल से भी अधिक है। मंदिर के पुजारी जबर सिंह का कहना है कि मंदिर के आसपास आज भी प्राचीन काल का सामान मिलता है। मंदिर समिति से जुड़े अशोक कुमार, अजय अग्रवाल, सुशील जिंदल, अंकित महर्षि, नानकचंद ने बताया कि प्राचीन समय में विजयनगर यहीं पर बसा हुआ था।
पत्थर को तराशकर बनी है मूर्ति
खेत से मिली मूर्ति हरे रंग के एक पत्थर को तराशकर बनाई गई है। इस तरह की कलाकृति दक्षिण भारत में देखने को मिलती हैं। मूर्ति की नक्काशी बहुत सुंदर तरीके से की गई है। कुछ श्रद्धालु मूर्ति को सैकड़ों साल पुरानी बता रहे हैं। प्राचीन काल की हरे ग्रेनाइट की सैकड़ों साल पुरानी मूर्ति मिलने से हर कोई हैरत में है।
50 साल पहले खेत से निकला था शिवलिंग
मंदिर में स्थापित शिवलिंग करीब 50 साल पहले एक खेत से निकला था। शिवलिंग के सामने स्थापित भगवान नंदी की मूर्ति भी कई दशक पुरानी है व जंगल से ही मिली थी। मंदिर के बारे में अनेक कथाएं प्रचलित हैं।
सिंधु घाटी सभ्यता से पुराना सामान मिला
कुछ साल पहले हीमपुरदीपा क्षेत्र के एक खेत से प्राचीन समय के बर्तन, हथियार आदि मिले थे। इस सामान को पुरात्व विभाग की टीम अपने साथ जांच के लिए ले गई थी। सूत्रों के अनुसार जांच में यह सामान सिंधु घाटी सभ्यता से भी प्राचीन समय का पाया गया है।
मिलती रहीं हैं हरे पत्थर की मूर्ति
इस क्षेत्र में लंबे समय से हरे पत्थर की बनी मूर्ति और अन्य सामान मिलते रहे हैं। करीब तीस साल पहले यहां से हरे पत्थर का बना जेवर ढालने का सांचा, हरे पत्थर का दीप और अंगूठी निकल चुकी हैं।