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लोगों को प्रकृति से जोड़ेंगे अमृत सरोवर

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लोगों को प्रकृति से जोड़ेंगे अमृत सरोवर
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बिजनौर। अमृत सरोवर लोगों को प्रकृति से जोड़ने का माध्यम बनेंगे। गांवों में बरसाती जल भराव से निजात मिलेगी। ये सरोवर भ्रमण स्थल भी होंगे और पर्यावरण शुद्धीकरण होगा। लक्ष्य के करीब 70 प्रतिशत अमृत सरोवरों पर निर्माण पूरा कर लिया गया है। ध्वजारोहण के लिए सजाने संवारने की तैयारी शुरू हो चुकी है। सीडीओ ने आवंटित कार्य 15 अगस्त से पहले पूरा करने के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।
अमृत महोत्सव के अवसर पर ध्वजारोहण अमृत सरोवर पर कराने के शासनादेश है। इससे अमृत सरोवरों का महत्व बढ़ गया है। अमृत सरोवरों को पर्यटन स्थल की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। ग्रामीण सुबह-शाम भ्रमण का आनंद ले सकेंगे। लोगों को प्रकृति से जोड़ने का यह अनूठा प्रयास है। सीडीओ पूर्ण बोरा ने बताया कि सरोवर पर पौधारोपण होगा। छायादार व औषधीय गुण वाले पौधे रोपे जाएंगे। इससे पर्यावरण प्रदूषण रोकने में मदद मिलेगी। गांवों में बरसाती व घरेलू जल के इकट्ठा होने के लिए तालाब हैं। परंतु अधिकांश जगह तालाबों के मिट्टी से पट जाने की शिकायत रहती है। इसके चलते बरसात में गांवों में जल भराव की स्थिति बनी रहती है।
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माना जा रहा है कि अमृत सरोवरों के बनने से ग्रामीणों को जल भराव से निजात मिलेगी। शासन का जल संरक्षण पर जोर है। अमृत सरोवर उन गांवों में बनाने के निर्देश हैं, जहां बरसाती पानी सरोवरों में आ सके। सीडीओ पूर्ण बोरा के अनुसार 15 अगस्त से पहले 225 अमृत सरोवर बनाने का लक्ष्य है। इनमें 150 अमृत सरोवर के निर्माण कार्य पूरा हो गया है।
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अमृत सरोवरों में रहेगा तीन मीटर जल
शासन की मंशा है कि जल का अधिक संरक्षण हो। इसलिए अमृत सरोवर निर्माण के मानक तय कर दिए हैं। बताया गया कि अमृत सरोवर एक एकड़ से लेकर 02.5 एकड़ जमीन में बनाए गए हैं। अमृत सरोवरों की गहराई तीन से चार मीटर निर्धारित है। सरोवरों में बड़ी मात्रा में जल एकत्रित होगा। भूमिगत जल स्तर बढ़ेगा। सीडीओ पूर्ण बोरा ने कहा कि अमृत सरोवर में पूरे वर्ष पानी रखने के भी प्रयास हैं।
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