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चीनी उद्योगों की और बेहतरी के लिए ढूंढने होेंगे विकल्प

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धामपुर शुगर मिल में पत्रकारों से वार्ता करते राष्ट्रीय शर्करा संस्थान कानपुर के डायरेक्टर प्रो? - फोटो : DHAMPUR
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चीनी उद्योगों की और बेहतरी के लिए ढूंढने होेंगे विकल्प
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धामपुर(बिजनौर)। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान कानपुर के निदेेशक डॉ. नरेंद्र मोहन ने रविवार को धामपुर चीनी मिल का निरीक्षण किया। उन्होंने मिल प्रबंधन को किसानों और चीनी उद्योगों की और बेहतरी के लिए नवीनतम प्रजातियों के गन्ने के बीज से बुवाई करने और उद्योग को चीनी और एथनॉल निर्माण के साथ मांग के अनुरूप गन्ने की खोई (बैगास) से क्रॉकरी आदि अन्य उत्पाद बनाने पर जोर दिया।
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प्रेसवार्ता में डॉ. नरेंद्र मोहन ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए नवीनतम प्रजाति को जोर देने की जरूरत है। हमें प्राकृतिक चीनी का भी उत्पादन करने के लिए आगे आना होगा। उन्होंने बताया कि कानपुर राष्ट्रीय शर्करा संस्थान 86 साल पुराना प्रदेश का इकलौता सरकारी संस्थान हैं, जहां हर साल विदेशों तक के छात्र शुगर टेक्नालॉजी सहित कई पाठ्यक्रमों पर शोध करते हैं। शर्करा के विभिन्न क्षेत्रों में नौ पाठ्यक्रम संचालित हैं। शर्करा संस्थान चीनी उद्योग और किसान के विकास की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि गन्ने के रस से एथनॉल व शीरे का और अधिक उत्पादन करना होगा। गन्ने की खोई (बैगास) से क्रॉकरी के सामान बनाने का सुझाव दिया। कहा कि प्रदेश में दो चीनी यूनिटों ने बैगास से क्राकरी की वस्तुओं को बनाने का काम शुरू कर दिया है। इस मौके पर उपाध्यक्ष एमआर खान, जीएम प्रशासन विजय गुप्ता आदि रहे। निदेशक ने बताया कि सहकारी चीनी मिले निजी मिलों की तुलना में पिछड़ती जा रही है। प्रदेश की सहकारी चीनी मिलों की क्षमता को और बढ़ाने के लिए संस्थान की ओर से क्षमतावर्धन कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। रूपरेेखा तैयार कर ली है। उनका मकसद किसान और उद्योग दोनों को और अधिक विकसित करना है।
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