भरे गए विकल्पों से अलग आवंटित किए परीक्षा केंद्र
धामपुर (बिजनौर)। केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) - 2021 में परीक्षा केंद्रों के निर्धारण से अभ्यर्थियों में असंतोष है। इनका कहना है कि आवेदन करते समय उन्होंने जिन चार जिलों को विकल्प के रूप में भरा गया था। वहां उनका परीक्षा केंद्र निर्धारण नहीं किया गया है। बल्कि प्रदेश के दूसरे जिलों में का आवंटन किया गया है। जिससे छात्र-छात्राओं के साथ उनके अभिभावकों भी परेशान हैं।
छात्रा यशी का कहना है कि उसने सीटीईटी में शामिल होने के लिए विकल्प के तौर पर प्रथम वरीयता बिजनौर, द्वितीय मुरादाबाद, तीसरी बरेली और चौथी वरीयता मेरठ जिले को दी थी। उसका परीक्षा केंद्र कानपुर आवंटित किया गया है। छात्रा मीनाक्षी राजपूत, कविता का कहना है कि उनका परीक्षा केंद्र राजस्थान के जिले को बनाया गया है। जबकि उनके द्वारा बिजनौर जिले के आसपास के जिलों को परीक्षा केंद्र के लिए विकल्प के तौर पर भरा था। मोहित कुमार, पंकज कुमार, रतन सिंह, करन सिंह, विकास का कहना है कि उनका परीक्षा केंद्र जिला झांसी, उरई आदि जिलों में आवंटित किया गया है। उन्होंने जिला बिजनौर , मुरादाबाद, अमरोहा को ही विकल्प तौर पर भरा था।
उनका कहना है कि पहले उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से यूपी टीईटी की परीक्षा को निरस्त कर देने से उनके मंसूूबों पर पानी फिर गया। अब वह चाहते थे कि सीटीईटी की मन से तैयारी कर सफलता हासिल करेंगे तो अब परीक्षा जिलों के चयन ने उनके मनोबल को गिरा दिया है। उन्होंने शासन से आवेदन में भरे जिलों में से ही किसी एक में परीक्षा केंद्र आवंटित करने की मांग की है। बताया गया कि 16 दिसंबर से लेकर 13 जनवरी तक अलग-अलग चरणों में यह परीक्षा ऑनलाइन होगी।
छात्र-छात्राओं के साथ हुआ अन्याय : बीएसए
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जयकरन सिंह यादव का कहना है कि छात्र-छात्राओं के साथ अन्याय हुआ है, लेकिन इसमें अब कोई संशोधन नहीं हो सकता। जिस जिले में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, छात्र-छात्राओं को वहीं परीक्षा देने के लिए जाना होगा। इस मामले से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
विभाग के अधिकारियों से करेंगे बात : डीएम
डीएम उमेश मिश्रा का कहना है कि इस तरह का कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं है। विभाग के अधिकारियों से बात कर छात्र-छात्राओं की समस्या से सरकार के प्रतिनिधियों को अवगत कराएंगे। यह परीक्षा केंद्र स्तर से आयोजित होती है। इसमें अब संशोधन नहीं किया जा सकता है।