- सपा-भाजपा दोनों की पार्टियों के दावेदारों की बेचैनी बढ़ी
- रालोद-भाजपा गठबंधन हुआ बदल जाएंगे जिले में समीकरण
- वर्ष 2009 में भी बिजनौर से जीते थे रालोद-भाजपा गठबंधन का प्रत्याशी संजय चौहान
रजनीश त्यागी
बिजनौर। जहां एक ओर बड़े स्तर पर भाजपा और रालोद गठबंधन की चर्चाएं चल रही है, वहीं दूसरी ओर जिले में राजनीतिक खेमों में इसकी सरगर्मी देखी जा सकती है। राजनीतिक पंडित भाजपा-रालोद और रालोद-सपा गठबंधन के साथ हार-जीत का समीकरण निकालने में जुटे हुए हैं। कुछ लोग इस नए गठबंधन को भाजपा के लिए फायदेमंद बता रहे हैं और 2009 में हुए लोकसभा चुनाव के आंकड़ों का हवाला भी दे रहे हैं। क्योंकि बिजनौर सीट पर 2009 के लोकसभा चुनाव में रालोद-भाजपा गठबंधन के प्रत्याशी संजय चौहान यहां पर जीते थे।
जिले में भाजपा से दावेदारों की लंबी कतार है। इनमें भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष मोहित बेनिवाल, सदर विधायक पति ऐश्वर्य मौसम चौधरी, पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह, कविता चौधरी, रामेंद्र सिंह का नाम भी चर्चाओं में हैं। सपा और रालोद से डॉ. नीरज चौधरी, विधायक चंदन चौहान, पूर्व विधायक रूचि वीरा, पूर्व रालोद जिलाध्यक्ष ब्रजवीर सिंह चौधरी, डॉ.रमेश तोमर दावेदारों के नाम चल रहे हैं।
ऐसे में अब भाजपा और रालोद के गठबंधन की चर्चाओं ने सभी दावेदारों की धड़कन बढ़ा दी है। रालोद के दावेदार सीट भाजपा के खाते में जाने की संभावना से खुद का टिकट कटा समझ परेशान हो रहे हैं। भाजपा से दावेदारों के खेमे में चर्चा है कि यदि सीट रालोद के खाते में गई तो टिकट नहीं मिलेगा। सपा की बात करें तो सपा दावेदार बनते-बिगड़ते समीकरण को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।
2009 में मिलकर लड़ चुके हैं रालोद-भाजपा, रालोद को मिली थी सीट
पुराने चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो भाजपा के साथ रालोद का गठबंधन पहली बार नहीं है। बिजनौर सीट पर वर्ष 2009 में दोनों पार्टी गठबंधन में चुनाव लड़ चुकी है। तब यह सीट रालोद के खाते में गई थी और जीत भी रालोद से प्रत्याशी रहे संजय चौहान को मिली थी। हालांकि इसके बाद इस सीट पर 2014 में भाजपा के सिंबल पर लड़े भारतेंद्र सिंह ने जीत दर्ज की थी। उस समय रालोद गठबंधन भाजपा से टूट चुका था। इसके बाद 2019 में बिजनौर सीट पर बसपा से चुनाव लड़े मलूक नागर जीत गए थे।
लखनऊ-दिल्ली में डेरा जमाए हुए हैं भाजपा दावेदार
भाजपा से दावेदारी करने वाले कई दावेदार इस समय लखनऊ और दिल्ली की परिक्रमा करने में जुटे हैं। एक ओर जहां प्रदेश उपाध्यक्ष मोहित बेनिवाल के नाम की चर्चा यहां से जोर पकड़ रही है, वहीं स्थानीय नेता भी अपना टिकट पक्का कराने के लिए शीर्ष स्तर से नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं।
बिजनौर सीट पर दो बार गुर्जर और एक बार जाट जीत चुके
बिजनौर लोकसभा सीट का गठन 2009 में हुआ था। पहली ही बार में रालोद से संजय चौहान जो गुर्जर बिरादरी से रहे हैं, जीत गए थे। इसके बाद जाट बिरादरी से 2014 में भाजपा से भारतेंद्र सिंह इस सीट से सांसद बने। 2019 के चुनाव में भले ही पार्टी बदल गई हो, लेकिन गुर्जर बिरादरी से बसपा के सिंबल से चुनाव लड़े मलूक नागर ने जीत दर्ज की।