-अमर उजाला की ओर से आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में बेटियों का बढ़ाया मनोबल
-भविष्य में कठिनाइयों को दूर कर जिम्मेदार नागरिक बनें बेटियां: दीपाली भार्गव
-नाटक के माध्यम से छात्राओं ने दिया लड़कियों के संघर्ष का संदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। बेटियों के लिए हर परिस्थिति में लड़कर अपना सम्मान बचाना जरूरी है। छात्राओं को भविष्य में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। लक्ष्य प्राप्त करने से पहले विफल होने पर निराश न हो। क्योंकि गलतियों से हर बार कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। इसके अलावा कार्यक्रम में नाटक के माध्यम से लड़की के संघर्ष के बारे में बताया।
अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से एचएम पब्लिक स्कूल में अपराजिता कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में छात्राओं ने पहली डॉक्टर आनंदीबाई जोशी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बेटियों के संघर्ष का परिचय दिया। अध्यापक आकांक्षा चौधरी ने गीत प्रस्तुत किया। ओ री छोटी सी चिड़िया, नन्हीं सी चिड़िया गीत गाया। कार्यक्रम में छात्राओं से अमर उजाला अखबार से संबंधित तीन प्रश्न पूछे गए। सही उत्तर देनी वाली छात्राओं को किताब देकर सम्मानित किया। छात्रा रेनू ने अपराजिता का अर्थ बताया। अपराजिता का मतलब कभी न हारने वाली। हाल ही में नई दिल्ली में हुआ बड़ा कार्यक्रम कौनसा था।
छात्रा नोरीन ने बताया कि वह कार्यक्रम जी-20 समिट था। इसके अलावा महात्मा विदुर के बारे में पूछा गया। जिसका उत्तर आकांक्षा कुमारी ने देते हुए कहा कि महात्मा विदुर का नाता महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। महात्मा विदुर का अंतिम समय बिजनौर की धरा पर ही बीता। कार्यक्रम का शुभारंभ एडीएम न्यायिक दीपाली भार्गव, स्कूल चेयरमैन अशोक कुमार, प्रधानाचार्य रविंद्र कुमार यादव ने मां सरस्वती की मूर्ति के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। छात्राओं को जागरूक करने के लिए आनंदीबाई जोशी का नाटक छात्रा नव्या, इशिका, महक, वैष्णवी, कृति मलिक, सोफिया आदि ने किया। वहीं छात्रा वंशिका राठी, रेनू सिंह, रिया, नम्रता आदि ने गाया। कार्यक्रम का संचालन जन्मेजय और रेनू ने किया।
अर्थव्यवस्था बढ़ाने में महिला और पुरुषों में समानता जरूरी : दीपाली भार्गव
एडीएम न्यायिक दीपाली भार्गव ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ाने के लिए महिला और पुरुषों में समानता जरूरी है। बेटियां शिक्षित होंगी तो देश शिक्षित होगा। आजादी के बाद से बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। लक्ष्य प्राप्ति तक हार नहीं माननी चाहिए। सभी बेटियां शिक्षित होकर एक जिम्मेदार नागरिक बनें।
जीवन में कभी हार नहीं मानें बेटियां: अशोक कुमार
स्कूल चेयरमैन सेवानिवृत्त अपर आयुक्त अशोक कुमार ने कहा कि बेटियां कभी भी अपने जीवन में हार नहीं मानें। जिन लड़कियों के माता-पिता नहीं पढ़ा पाते हैं, वह ससुराल में पढ़ती हैं। इसके बाद उन्होंने बिजनौर के इतिहास के बारे में बताया।
बेटियों को अब खुद को पहचानने की जरूरत: रविंद्र कुमार यादव
प्रधानाचार्य रविंद्र कुमार यादव ने कहा कि बेटियां कभी हार नहीं मानती हैं। उनके अंदर बहुत ताकत, जज्बा है। बस अपने आप को पहचानने की जरूरत है। इसके बाद में मेरी बेटी, मेरी रोशनी मेरे घर की गीत गाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।