- सहारनपुर, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद समेत कई जिलों में पहुंचा
- विशेषज्ञ मान रहे गुलदार ने जंगल से निकल गन्ने के खेतों में रहना सीखा
- आने वाले पांच से दस साल में समस्या ले लेगी विकराल रूप
- 50 गुलदार पिछले वर्ष बिजनौर जिले में मारे और पकड़े गए
- 12 गुलदार इस वर्ष दुर्घटना में मारे गए या पकड़े गए
- 20 लोगों की जान 13 माह में गुलदार के हमलों में गई
रजनीश त्यागी
बिजनौर। अब बिजनौर के बाद गुलदार का शोर पड़ोसी जिलों में भी सुनने को मिलने लगा है। गुलदार की दस्तक एक या दो जिलों में नहीं, बल्कि वेस्ट यूपी के अधिकांश जिलों में हो चुकी है। जहां बिजनौर में इस माह करीब 10 गुलदार या तो पकड़े गए या फिर दुर्घटना में मारे गए हैं, वहीं बागपत और शामली में शनिवार को दो गुलदार वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू किए। इससे पहले सहारनपुर, गाजियाबाद, अमरोहा, मुरादाबाद, मेरठ, नोएडा में गुलदार अपनी दस्तक दर्ज करा चुका है।
यूं तो मेरठ बीच शहर में गुलदार कई बार अपनी दस्तक दे चुका है, लेकिन पिछले सवा साल से बिजनौर सबसे ज्यादा गुलदार को लेकर चर्चाओं में रहा है। पिछले 13 माह में 20 लोगों की जान गुलदार के हमलों में चली गई, वहीं इस दौरान 60 से ज्यादा गुलदार या तो दुर्घटनाओं में मारे गए या फिर पकड़े गए। अब यह समस्या बिजनौर से निकलकर सहारनपुर, बागपत, मुजफ्फरनगर और शामली तक भी पहुंच गई है। आए दिन यहां भी गुलदार के दिखने की सूचनाएं मिल रही है।
अमानगढ़ में नहीं अब सहारनपुर के शिवालिक में भेजे गुलदार
पिछले साल की शुरूआत तक वेस्ट यूपी में पकड़े गए गुलदार अमानगढ़ में लाकर छोड़े जा रहे थे। अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, बिजनौर समेत कई जिलों के गुलदार अमानगढ़ में छोड़े गए। जब यहां पर लगातार लोगों की जान गुलदार के हमलों में गई तो अमानगढ़ में गुलदार छोड़ने पर रोक लगा दी गई। अब बिजनौर से भी गुलदार सहारनपुर के शिवालिक के जंगलों में भेजे जा रहे हैं। अभी तक दो से तीन गुलदार सहारनपुर शिवालिक के जंगलों में छोड़े जा चुके हैं।
गन्ने के जंगल का राजा हो गया गुलदार : जोएल लॉयल
जिम कार्बेट के रिसर्च स्कॉलर एवं वरिष्ठ वन्य जीव विशेषज्ञ जोएल लॉयल कहते हैं कि गुलदार ने गन्ने को अपना आवास बना लिया है। यहां पर जो गुलदार के शावक पैदा हो रहे हैं, उनके लिए यही प्राकृतिक आवास है। ऐसे में यह समस्या और विकराल होती जाएगी। क्योंकि पूरा वेस्ट यूपी गन्ना क्षेत्र है। अकेले बिजनौर में तीन लाख हेक्टेयर के करीब गन्ने का क्षेत्रफल है। वहीं, दूसरी ओर रिजर्व फॉरेस्ट में बाघ से गुलदार को बचकर और छिपकर रहना पड़ता है, यहां पर ऐसा नहीं है। गुलदार गन्ने के खेतों का राजा हो चुका है।