सीआरपीएफ में भर्ती होने के दौरान ही आदित्य राणा अपराध के दलदल में कूद पड़ा और कासमाबाद में 11 दिसंबर 2013 को हुई धर्मवीर की हत्या में आदित्य सहित चार के खिलाफ केस दर्ज किया गया। आदित्य ने 22 जून 2014 को मुरादाबाद के सिविल लाइंस में डॉ. जहांगीर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इन दोनों मामलों में वह गिरफ्तार हुआ। वहीं तीन अगस्त 2017 को पेशी के दौरान कचहरी से सिपाहियों की आंखों में मिर्च झोंककर फरार हो गया था।
फरार होने के दौरान ही उसने 14 अक्तूबर 2017 में अपने गांव के ही मुकेश की गोली मार कर हत्या कर दी थी। 27 सितंबर 2018 को मुकदमे की पैरवी कर रहे मुकेश के छोटे भाई राकेश की हत्या कर दी।
इसी दौरान बिजनौर के हल्दौर थाना क्षेत्र में अम्हेड़ा में ओमराज की हत्या की और कुछ दिन वह बिजनौर के चांदपुर थाना क्षेत्र के गोहली में इरशाद के घर छुपा था। तब एसओजी की टीम ने दबिश दी तो वह गोलियां बरसाता हुआ अपने साथी विशाल और रोहित के साथ फरार हो गया।
इसके बाद तीन बार और पुलिस ने उसे घेरा लेकिन वह हाथ नहीं आया। पुलिस का शिकंजा कसा तो उसने कोर्ट में समर्पण कर दिया। इसके बाद फिर पेशी के दौरान मंगलवार रात शाहजहांपुर से फरार हो गया। नौ साल में आदित्य पर 41 मुकदमे दर्ज हुए।
आदित्य राणा के खिलाफ हत्या, लूट, हमला, गैंगस्टर, डकैती और पुलिस मुठभेड़ की धाराओं में केस दर्ज हैं। स्योहारा थाने में 12, हल्दौर थाने में तीन, धामपुर में तीन, मंडावली में दो, नूरपुर में एक, हीमपुर दीपा में दो, शिवालाकलां में पांच, चांदपुर में तीन, नगीना में एक, कोतवाली देहात में दर्ज एक मामले सहित 41 मुकदमे दर्ज हैं। स्योहारा थाने में आदित्य गैंग का डी-27 के नाम से गैंग रजिस्टर्ड है। आदित्य सरगना और गांव चंचलपुर निवासी विशाल व स्वाहेड़ी निवासी रोहित उसके गैंग का सक्रिय सदस्य है।
फिलहाल पुलिस आदित्य राणा के शव को परिजनों को सौंपने की तैयारी कर रही है। वहीं मुठभेड़ के दौरान कई सिपाही भी घायल हुए हैं। उनका अस्पताल में उपचार चल रहा है।