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इबादत कर हासिल करें खुदा की रहमतें

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मौलाना लईक। - फोटो : NAZIBABAD
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इबादत कर हासिल करें खुदा की रहमतें
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नजीबाबाद। माह ए रमजान का पहला अशरा चल रहा है। मुकद्दस रमजान का पहला अशरा रहमतों का अशरा कहलाता है। उलमा-ए-दीन फरमाते हैं कि इस अशरे में बंदों पर खुदा की रहमतें बरसतीं हैं।
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मौलाना लईक फरमाते हैं कि रमजान के पहला अशरा रहमत का अशरा है। इसमें ज्यादा से ज्यादा इबादत कर अल्लाह की रहमतें हासिल की जाती हैं। उन्होंने कहा कि रोजा खुदा और बंदे की बीच के रिश्ते को मजबूती देता है। इंसान के अंदर की बुराइयों को रोजा दूर कर गरीबों से हमदर्दी का जज्बा पैदा कराता है। मौलाना इम्तियाज का कहना है कि रमजान में ज्यादा से ज्यादा इबादत करने वालों के अल्लाह गुनाह माफ कर देता है। उन्हें नेकी और इंसानियत की राह पर चलने की तौफीक अता फरमाता है। लॉकडाउन के दौरान रमजान की अहमियत बढ़ गई है। इसलिए हमें उन लोगों की जरूरतों को पूरा करना है जो कारोबार से परेशान हैं। नगरपालिका परिषद के पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद अज्जम खां एड. फरमाते हैं रमजान का महीना नेकी हासिल करने का मुकद्दस महीना है। इस महीने में की गई इबादत जहां बंदे को अल्लाह के नजदीक ले जाती है, बुराइयों से बचाती है, वहीं हमें रमजान उन लोगों से हमदर्दी का जज्बा भी दिलाता जो आर्थिक परेशानियों के चलते परेशान हाल होते हैं।

मौलाना इम्तियाज।- फोटो : NAZIBABAD

मौअज्जम खां एड.।- फोटो : NAZIBABAD

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