- आधे अधूरे पुल से ही लोगों ने चालू कर दी थी आवाजाही
- उखड़ने लगे हैं पुल के एक्सपेंशन ज्वाइंट, हादसों का खतरा
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। बढ़ापुर को सीधे नजीबाबाद से जोड़ने के लिए खो नदी पर पुल का निर्माण चालू हुआ था लेकिन इसे एक दशक बाद भी पूरा नहीं किया जा सका है। दरअसल मामला सुप्रीम कोर्ट में होने के कारण भी पुल का निर्माण बंद कर दिया था। उधर लोगों ने खुद ही एक तरफ से कच्चा पहुंच मार्ग बनाते हुए आवाजाही चालू कर दी थी, अब इस पुल के एक्सपेंशन प्वाइंट उखड़ने लगे हैं जोकि हादसों को न्यौता दे रहे हैं।
बढ़ापुर और रायपुर के बीच खो नदी बहती है। साल 2012 के आस पास खो नदी शाहलीपुर कोटरा के पास पुल का निर्माण चालू हुआ था। साल 2015 तक आते आते इस पुल के निर्माण पर ब्रेक लग गया। बता दें कि पुल के पास वाले एक किसान ने निर्माण पर आपत्ति जता दी थी। किसान का तर्क था कि पुल गलत जगह बना दिया गया है। जिससे उसकी जमीन प्रभावित हो रही है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है। जिसके चलते एक दशक बाद भी पुल आधा अधूरा ही है। हालांकि उस वक्त 90 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया था। रायपुर सादात की ओर से पुल को जोड़ने के लिए पहुंच मार्ग भी बनाया गया।
हालांकि बढ़ापुर की दिशा में पहुंच मार्ग नहीं बनाया जा सका था। जिसके बाद ग्रामीणों ने आपस में सहयोग कर पुल के पास मिट्टी डालते हुए कच्चा पहुंच मार्ग तैयार किया और आवाजाही शुरू कर दी थी। साल 2015 से दर्जनों गांव के ग्रामीण इस पुल से आवाजाही कर रहे हैं। उधर ग्रामीणों के सहयोग से बनाया गया कच्चा पहुंच मार्ग भी टूट रहा है। उधर पुल के ऊपर स्लैब के बीच में लगी लाेहे की एंगल उखड़कर ऊपर आ गई हैं। जिससे वाहनों के टायरों के फटने का खतरा बना रहता है। इस लोहे की एंगल को एक्सपेंशन ज्वाइंट कहा जाता है। जिन्हें पांच से छह साल बाद बदलना जरूरी होता है।
नजीबाबाद से सीधे जड़ने का सपना अधूरा
इस पुल को पूरी तरह से तैयार करते हुए चालू नहीं होने की वजह से बढ़ापु़र को सीधे नजीबाबाद से जुड़ने का सपना अधूरा है। भारी वाहनों को नगीना से होते हुए नजीबाबाद जाना पड़ता है। हालांकि हल्के वाहन तो इस पुल से गुजर जाते हैं।
पूरी तरह से टूट चुकी है सड़क
नजीबाबाद से रायपुर सादात होते हुए खो नदी के पुल तक एक सड़क जाती है। पुल निर्माण के साथ ही रायपुर सादात से खो नदी के पुल तक तारकोल की सड़क बना दी थी गई लेकिन अब सड़क पूरी तरह से टूट चुकी है। सड़क अब कहीं भी पक्की दिखाई नहीं देती, पूरी तरह से पथरीली हो गई है।
यह बोले पूर्व प्रधान
साल 2014 में उनके प्रधान पद पर रहते हुए मिट़्टी डालकर पुल को सड़क से जोड़ लिया गया था। कच्ची सड़क ग्रामीणों ने खुद मिलकर तैयार की थी, अब पुल का निर्माण भी अधूरा है और सड़क भी खस्ताहाल है। इससे भारी परेशानी होती है। ....रामवीर, पूर्व प्रधान शाहलीपुर कोटरा