बिजनौर। नटवरलाल गैंग ने सरकारी योजनाओं की धनराशि के ड्राफ्ट पर फर्जी हस्ताक्षर कर जिले में कई विभागों को करीब एक करोड़ रुपये का चूना लगाया है। इस गिरोह के तार बिजनौर ही नहीं बल्कि अन्य जनपदों तक भी फैले हैं। अमरोहा के जिला समाज कल्याण अधिकारी के नाम से भी बिजनौर में साढ़े पांच लाख रुपये का ड्राफ्ट कैश हुआ है। अहम बात ये है कि बैंक अधिकारी अौर कर्मचारियों की मिलीभगत से यह सारा खेल हुआ है।
गिरोह के सदस्यों ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के 25 लाख रुपये, समाज कल्याण विभाग की योजनाओं की योजनाओं का 30 लाख रुपये विभाग की फर्जी चिट्टी अौर अफसरों के फर्जी हस्ताक्षरों के माध्यम से रुपये उड़ाए हैं। इसके अतिरिक्त गत वर्ष शहरी क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग के छात्र - छात्राओं की करीब 35 लाख रुपये की छात्रवृत्ति खातों में नहीं पहुंची थी। वर्ष भर सरकारी स्कूलों के छात्र- छात्राएं अौर अध्यापक पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के चक्कर लगाते रहे, कोई सुनवाई नहीं हुई। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अफसरों का तर्क था कि विभाग ने छात्रवृत्ति की धनराशि स्कूलों में भेज दी, लेकिन स्कूल तक छात्रवृत्ति नहीं पहुंची। माना जा रहा है कि छात्रवृत्ति की रकम भी नटवरलाल गैंग ने हड़पी है। गिरोह ने बिजनौर के अलावा अमरोहा में भी सरकारी योजनाओं की धनराशि निकाली। बिजनौर के एक बैंक से अमरोहा के जिला समाज कल्याण अधिकारी के नाम से ड्राफ्ट कैश हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक फर्जीवाड़ा करने वाले गैंग से बैंक अधिकारी भी मिले हैं। ड्राफ्ट देते समय अौर ड्राफ्ट को कैश करते समय सभी नियमों को ताक पर रखा। ड्राफ्ट अधिकारी के नाम या पद नाम से हैं। इन ड्राफ्टों पर मोहर किसी अधिकारी की लगी है और फर्जी हस्ताक्षर अन्य अधिकारी के हैं। बैंक अधिकारियों ने ड्राफ्ट पर किए फर्जी हस्ताक्षरों का वास्तविक हस्ताक्षर से मिलान नहीं किया। पचास हजार रुपये से अधिक की रकम किसी खाते में ट्रांसफर करने पर बैंक अधिकारी पैन कार्ड मांगते हैं। गैंग ने एक बार में ही तीन तीन लाख रुपये फर्जी संस्थाओं के खाते में ट्रांसफर कराए, लेकिन उनका कोई पैनकार्ड नहीं देखा। ड्राफ्ट कैश करते समय भी बैंक अधिकारियों ने नहीं खाता संख्या पर आपत्ति नहीं लगाई। सरकारी धनराशि संबंधित विभाग को वापस करते समय भी ड्राफ्ट रजिस्ट्री से भेजा जाना चाहिए, यहां थर्ड पार्टी को बाईहैंड ही ड्राफ्ट दे दिया।
विभागीय भाषा का ज्ञान हैं गिरोह को
बिजनौर। गिरोह के सदस्यों को विभागीय भाषा का पूरा ज्ञान है। बैंकों को गैंग द्वारा दी चिट्टी में विभागीय भाषा लिखी है। कहीं विभागीय कर्मचारी भी तो इस खेल में शामिल नहीं है।
पुलिस नहीं ले रही है दिलचस्पी
बिजनौर। पुलिस ने अभी किसी भी आरोपी को नहीं दबोचा है। विभाग की ओर से दी गई तहरीर में जो लोग नामजद किए गए हैं, उनसे भी कोई खास पूछताछ नहीं हुई है।
सीसी टीवी कैमरे बताएंगे हकीकत
बिजनौर। बैंकों में लगे सीसी कैमरे गैंग के चेहरे से पर्दा हटाएंगे। बैंकों से किस तिथि में और किस समय राशि निकाली, इसका डाटा जुटाया जा रहा है। इसके बाद स्थिति क्लियर होगी।
टीम कर रही है जांच
जांच समिति में शामिल डीडीओ अशोक निगम, वरिष्ठ वित्त लेखा अधिकारी डीआरडीए भागमल शाडिंल्य अौर एआर कोऑपरेटिव आरपी मिश्रा मामले की जांच कर रहे हैं।