नजीबाबाद। करबला के शहीदों और इमाम हुसैन की बेशकीमती कुर्बानी के जिक्र के साथ जोगीरम्पुरी का शमसुल हसन हॉल मातमी मजलिसों से गूंज रहा है। दूसरे दिन मातमी मजलिसों के साथ हजारों जायरीनों ने जुमे की नमाज अदा की।
मुश्किलकुशा मौला अली की कुर्बानियों के जिक्र के साथ जोगीरम्पुरी दरगाह परिसर मातम में डूबा हुआ है। शुक्रवार को नौगांवा से आए मौलाना कुर्रतुल एन मुज्तबा ने हजारों जायरीनों को जुमे की नमाज अदा कराई। उन्होंने इमाम हुसैन की कुर्बानियों से सबक लेने, आमाल सुधारने की सलाह दी। नमाज से पूर्व एवं बाद में शमसुल हसन हॉल से मातमी मजलिसों को खिताब करते हुए उलेमा ने करबला के शहीदों की कुर्बानियों का जिक्र किया। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना मजाहिर अली लखनवी, मौलाना सैयद अब्बास रजा छोलसी, मौलाना वसी हसन फैजाबादी ने कहा कि मौला-ए-कायनात ने दीन और इस्लाम के लिए अपना सब कुछ लुटा दिया। उधर, मौला अली के रोजे पर इबादतों के लिए जायरीन उमड़े। बच्चों सहित हर उम्र के जायरीनों ने बारगाह-ए-मौला में हाथ फैलाकर मन्नतें मांगी। सचिव विसाल मेहंदी के नेतृत्व में कमेटी सदस्यों ने जायरीनों के सामने आ रही परेशानियों को दूर करने में ताकत झोंक दी। प्रदेश के राज्यमंत्री महबूब अली ने शुक्रवार की शाम दरगाह की जियारत कर चादर चढ़ाई।
दीन के रहबरों के उसूलों को अपनाएं : कुर्रतुल एन मुज्तबा
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शिया विद्वान कुर्रतुल एन मुज्तबा ने कहा पैगंबर और नबियों ने दुनिया को नेकी, इंसानियत और दीन को जिंदगी का मकसद बनाने की नेक हिदायत दी। सही जिंदगी जीने का यही तरीका है कि हम दीन के रहबरों के उसूलों एवं उनके द्वारा दी गई कुर्बानियों को जिंदगी का हिस्सा बनाएं।
रसूल की जिंदगी से सबक लें : मौलाना अथर कासमी
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मेरठ से आए मौलाना सैयद मो. अथर कासमी ने सीरत से रसूल मौजू से अपने खिताब में कहा कि जो लोग रसूल के किरदार को समझते हैं, दीनी और दुनियावी खिदमत को जिंदगी का मकसद बनाते हैं, उन पर नेमतें और बरकतें बरसती हैं।
इस्लाम ने दिया प्यार-मोहब्बत का पैगाम : एजाज गदीरी
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बनारस से आए शिया विद्वान एजाज गदीरी ने कहा कि इस्लाम दीन-ए-अमन है। इस्लाम ने हमेशा प्यार-मोहब्बत और अमन का संदेश दिया है। हजरत मोहम्मद साहब ने पूरी जिंदगी दुनिया में अमनो-अमान और प्यार-मोहब्बत को कायम रखने में गुजार दी। नबी-ए-करीम ने रंग और नस्ल के भेद को मिटाने के लिए मिशन चलाया।
इस्लाम में आतंकवाद की जगह नहीं : शौजब काजिम
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शिया विद्वान शौजब काजिम लखनवी ने कहा कि इस्लाम में आतंकवाद की कोई जगह नहीं है। इस्लाम का सीधा-सच्चा रास्ता है। जो लोग आतंकी सोच रखते हैं, उनका दीन और इस्लाम से कोई मतलब नहीं होता।
दरगाह सचिव ने संभाली कमान
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नजीबाबाद। शिया समाज की विश्व प्रसिद्ध सालाना मजलिसों में जियारत के लिए आने वाले जायरीनों को भी डग्गामार वाहनों ने नहीं बख्शा। जायरीनों की शिकायत थी कि स्टेशन पर रोडवेज बसों के स्थान पर डग्गामार वाहन पुलिस की मदद से जायरीनों से मात्र आठ किलोमीटर की दूरी के 20 से 25 रुपये वसूल कर रहे हैं। सूचना मिलते ही दरगाह कमेटी के सचिव विसाल मेहंदी, कैसर अब्बास अच्छन, रईस अब्बास जक्कन, मोज्जिस अब्बास शब्लू, शामिक रजा एवं अली अब्बास ने पूरी रात स्टेशन पर रहकर लगभग 25 रोडवेज बसों के जरिये सैकड़ों जायरीनों को दरगाह पहुंचाया। उन्होंने अधिकांश रोडवेज बसों का किराया स्वयं वहन कर धर्म लाभ उठाया।