बिजनौर। राज्यमंत्री मनोज पारस और उनके तीन साथियों पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2006 में एक महिला से उसके पति को राशन की दुकान आवंटित कराने के नाम पर अपने नगीना स्थित आवास पर बुलाकर सामूहिक दुष्कर्म को अंजाम दिया था। इस मामले की रिपोर्ट अदालत के माध्यम से दर्ज हुई थी। मनोज पारस और उसके साथियों ने हाईकोर्ट से चार्जशीट दाखिल होने तक अपनी गिरफ्तारी पर स्टे प्राप्त कर लिया था। पुलिस ने नवंबर 2007 में चार्जशीट कोर्ट में पेश की थी। उसके बावजूद भी राज्यमंत्री और उनके साथी अदालत में पेश नहीं हुए। 16 जनवरी 2012 को प्रथम अपर सीजेएम दिनेश सिंह ने राज्यमत्री और उनके साथियों को फरार घोषित करते हुए उनके गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए थे। इस निर्णय को सत्र न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर चुनौती दी गई थी।