बिजनौर। सूखे की आशंका के चलते इस बार जिले में बारीक धान की रोपाई कम हुई है। इसी इसी के चलते इसका रकबा पहले के मुकाबले इस बार आठ हजार हेक्टेयर से भी अधिक घटा है।
जिले में धान का रकबा 54 हजार हेक्टेयर है। गत वर्ष बारीक धान करीब 34 हजार हेक्टेयर था, जो इस बार घटकर 26 हजार हेक्टेयर रह गया है। बारीक धान लगाने में ज्यादा लागत आती है। समय पर सिंचाई की भी आवश्यकता होती है। ऐसे लोग जिनके पास सिंचाई के साधन कम हैं, शुरुआती दौर में सूखे के हालात को देखते हुए उन्होंने बारीक धान की बुआई नहीं की है। जिले में हर बार बासमती में पूसा वन, सुगंधा पांच, वल्लभ भाई आदि वैरायटियों पर सूखे की आशंका ने प्रभाव डाला है। जिला कृषि अधिकारी शिव कुमार के मुताबिक जिन किसानों ने बारीक धान की रोपाई की है, उन्हें नुकसान नहीं होगा। बारीक धान को कम पानी की जरूरत होती और कम समय में ही फसल तैयार हो जाती है। शुरू में सूखे की आशंका के चलते कुछ किसानों ने बारीक धान नहीं लगाया है।