नजीबाबाद। रेलवे ने ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के लिए 100 साल पुराने दो पुल मात्र 8-8 घंटे के मेगा ब्लॉक के साथ एक दिन में बदल दिए। हालांकि रेलवे ने दोनों पुराने पुल बदलने के अभियान में कंक्रीट बॉक्स पहले ही तैयार कर लिए थे। इन पुलों से चार वर्षों से कॉशन के साथ ट्रेनें गुजारी जा रही थीं।
रेलवे के प्रवर मंडल अभियंता पारितोष गौतम, सहायक मंडल अभियंता करन प्रीत सिंह के निर्देशन में बुंदकी से नगीना के बीच रेलवे ने दो दिन में दो खस्ताहाल रेल पुल बदल दिए। पुल संख्या 1215 और 1218 से गत चार वर्षों से डाउन लाइन 40 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेनें गुजर रही थीं।
मुरादाबाद से आए प्रवर मंडल अभियंता पारितोष गौतम के निर्देशन में पोर्कलैंड मशीन, 90 टन क्षमता की क्रेन और 20 जेसीबी के साथ रेलवे ने पुुराना पुल संख्या 1218 ट्रैक सहित उखाड़ कर नया पुल बनाने का बृहस्पतिवार सुबह नौ बजे शुरू किया। रेलवे ने सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक डाउन लाइन का संचालन रोकने के लिए मेगा ब्लॉक लिया था। इस दौरान सहारनपुर व नजीबाबाद स्टेशन से लंबी दूरी की ट्रेनों राप्ती गंगा और स्यालदाह एक्सप्रेस का रूट डायवर्ट किया गया। सहायक मंडल अभियंता करन प्रीत सिंह ने बताया कि नए पुल से फिलहाल 30 किमी. की रफ्तार से ट्रेनें गुजारी जा रहीं हैं। 3.1 मीटर लंबाई का पुराना एक पुल 31 दिसंबर 2017 को बनाया गया था उस पर से ट्रेन 40 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से गुजर रही हैं। एडीईएन ने बताया कि दो सप्ताह के भीतर दोनों पुलों से ट्रेनें तेज स्पीड के साथ गुजरना शुरू होंगी। रेलवे ने दोनों पुराने पुल बदलने के अभियान में कंक्रीट बॉक्स पहले ही तैयार कर लिए थे। पुल बदलने के अभियान में पीडब्ल्यूआई के एल. वर्मा, एसके शर्मा, बाबूराम के नेतृत्व में बड़ी संख्या में रेल मजदूर कार्य में लगाए गए।