बिजनौर। प्रशासनिक अधिकारी किसी रात को अगर महिला जिला अस्पताल को निरीक्षण करें तो चिकित्सक व स्टाफ की लापरवाही का और ज्यादा पता सकता है। आलम यह है कि अप्रशिक्षित स्टाफ को कक्ष में बैठाकर महिला चिकित्सक स्वयं अस्पताल के ऊपरी मंजिल पर बने कमरे में सोने चले जाती हैं।
जिला महिला अस्पताल में सोमवार शाम से मंगलवार सुबह तक पांच नवजात बच्चों की मौत हो गई थी। इससे स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई। हालांकि स्वास्थ्य अधिकारी इसको सामान्य मौत बताकर अपने को बचाते हुए नजर आए, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी रात को जिला महिला अस्पताल का निरीक्षण करें तो चिकित्सकों व स्टाफ की पोल खुल सकती है। चिकित्सक अस्पताल भवन के ऊपरी मंजिल पर बने कमरों में सोते मिलते हैं। स्टाफ आराम से हीटर के सामने मूंगफली खाती मिलती हैं। अमर उजाला की टीम ने घटना के अगले दिन बुधवार शाम सात बजे जब जिला महिला अस्पताल का स्टिंग ऑपरेशन किया तो स्टाफ कक्ष में ताला लगा हुआ था। चिकित्सक अपने कमरे में नहीं थीं, यहां तक की वह अस्पताल के राउंड पर भी नजर नहीं आईं। स्टाफ के मुताबिक वह अस्पताल के ऊपर बने कमरे में आराम फरमारा रही थी। तीमारदारों की मानें तो रोजाना यही हाल रहता है। चिकित्सक दिन में दो बजे के बाद इधर-उधर चलते जाते हैं। कभी कभी तो दिन तक चिकित्सक मरीजों को देखने तक नहीं आती हैं। नर्स ही उन्हें दवा देती हैं।