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जिले में फैली ग्लैंडर्स बीमारी, एक घोड़ा खुद मरा, दूसरे को विभाग ने मारा

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अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा।
जिले में खतरनाक बीमारी ग्लैंडर्स ने पांव पसार लिए हैं। जिससे पशु पालन विभाग में हड़कंप मचा है। अधिकारियों की नींद गायब है। बीमारी की चपेट में आया एक घोड़ा खुद मर गया है, जबकि दूसरे को विभाग ने पेनलैस किलर देकर मारा है। यह छूआछूत की बीमारी है, पशुओं के जरिए मनुष्यों में भी फैलने का खतरा रहता है। इसलिए अधिकारियों ने परिवार के लोगों से लक्षण मिलने पर जांच कराने की हिदायत दी है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने अभी तक परिवारों की सुध नहीं ली है और न ही परीक्षण किया है।
धनौरा क्षेत्र के गांव कंजर बसेड़ा निवासी शमीम व उसके भाई तहसीन के घोड़े बीमार पड़ गए थे। ग्लैंडर्स सरीखे लक्षण मिलने पर पशु पालन विभाग के अधिकारियों ने दोनों घोड़ों के सैंपल लिए थे और उनको जांच के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र सिरसा रोड हिसार भेजा था। इसी दरम्यान तहसीन का घोड़ा मर गया था, लेकिन जब हिसार से सैंपल की जांच आई तो अफसरों के होश उड़ गए। दोनों घोड़े ग्लैंडर्स बीमारी से पीड़ित पाए गए। इसके बाद अधिकारियों ने डीएम से शमीम के घोड़े को मारने की इजाजत ली। पेन लैस किलर इंजेक्शन देकर मार डाला।
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चूंकि ये बीमारी एक से दूसरे को होने वाली है। पशुओं से मनुष्यों में फैल सकती है। इसलिए विभागीय अफसर परिवार के सदस्यों को लेकर और बेचैन हो गए। उन्होंने दोनों के परिजनों को बीमारी के लक्षण बताए और नजर आने पर तुरंत सूचित करने को कहा। मामले की नजाकत को देखते हुए अधिकारियों ने पूरे जिले में मानीटरिंग का कार्य शुरू करा दिया है। सीएमओ को पत्र लिखकर परिवार के सदस्यों का भी परीक्षण कराने की गुजारिश की। पखवाड़े से ज्यादा समय बीत गया है, किंतु स्वास्थ्य अफसरों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।

20 में से दो घोड़ों की रिपोर्ट संवेदनशील
अमरोहा। दो घोड़ों में ग्लैंडर्स की पुष्टि होने के बाद हरकत में आए पशु पालन विभाग ने जोया कस्बा व बुढ़नपुर क्षेत्र के 20 घोड़ों के सैंपल लेकर हिसार स्थित अनुसंधान केंद्र भेजे। जहां से उनकी रिपोर्ट आई है। डिडौली गांव के दो घोड़ों की रिपोर्ट संवेदनशील आई है। जिससे महकमे के अफसर बेचैन हो गए हैं। सच्चाई जानने के लिए उन्होंने एक टीम हिसार भेज दी है। रिपोर्ट आने पर ही अगली कार्रवाई होगी।

घोड़ा मेले पर लगाई रोक
अमरोहा। घोड़ों में फैली बीमारी को लेकर विभागीय अफसर सतर्क हो गए हैं। प्रशासन भी पूरी तरह मसले को लेकर गंभीर है। जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल ने रजबपुर क्षेत्र के गांव खाता में आगामी दिनों में लगने वाले घोड़ा मेला के आयोजन पर रोक लगा दी है। यह कार्रवाई उन्होंने सीवीओ की रिपोर्ट पर की है।

बीमारी का नहीं कोई इलाज
अमरोहा। ग्लैंडर्स व फर्सी बीमारी का अभी तक कोई इलाज नहीं है। जिस घोड़े को बीमारी लग जाती है, उसको पशु पालन विभाग मारने की कार्रवाई करता है। किसी और को बीमारी न लगे, इसलिए यह कार्रवाई होती है।
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ये हैं घोड़े को होने वाली ग्लैंडर्स व फर्सी बीमारी के लक्षण...
तेज बुखार का आना
गले में खरास या खांसी होना
नाक का बहना
न ठीक होने वाले ग्रंथी व त्वचा रोग का होना
बीमारी से पीड़ित घोड़ा खाना बंद कर देता है
पीड़ित घोड़े की शारीरिक क्षमता कमजोर हो जाती है।

दो घोड़े ग्लैंडर्स से पीड़ित पाए गए थे। एक खुद मर गया था और दूसरे को विभाग ने डीएम से अनुमति लेकर मारा था। जिन लोगों के घोड़े मरे हैं, उनको सरकार की ओर से 25-25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। घर के सदस्यों में बीमारी न हो, इसलिए सीएमओ को पत्र लिखकर जांच कराने के लिए कहा गया है।
बृजवीर सिंह, सीवीओ।

ग्लैंडर्स बीमारी के फैलने से संबंधित कोई सूचना विभाग के पास नहीं आई है। अगर ऐसा कहीं कुछ है तो गांव में टीम भेजकर जांच कराई जाएगी।
डा. एसके जैन, सीएमओ।
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