अमरोहा। सरकार की देश की सेवा में जान देने वाले सैनिकों के गांव को चमकाने की तैयारी है। इनका कायाकल्प किया जाएगा। मुख्यमंत्री समग्र ग्राम विकास योजना के तहत शहीदों के नौ गांव सहित 56 ग्रामों के प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। शहीदों की याद में गांव के बाहर शहीद द्वार भी बनाया जाना प्रस्तावित है।
सूबे की सरकार मुख्यमंत्री समग्र ग्राम विकास योजना को लागू करते हुए गांव के विकास की कवायद कर रही है। हाल ही में शासन की ओर से गांव का चयन करते हुए प्रस्ताव मांगे गए थे। प्रदेश भर के जिलों में पांच पांच प्रतिशत गांव योजना में शामिल किए जाएंगे। अमरोहा में 948 राजस्व गांव हैं। जिनमें से करीब पचास गांव यह योजना चलेगी। पांच प्रतिशत गांव का चयन करने के लिए शासन ने गाइडलाइन जारी कर दी थी। जिसमेें सेना या अर्धसैनिक बलों में रहते हुए शहीद होने वाले जवानों के गांव को भी चुना जाना है। इसके साथ ही बेहद पिछड़े, आदिम जनजाति के गांव को रखा जाना प्रस्तावित है। जिस पर प्रशासनिक अधिकारियों ने अर्धसैनिक बलों में शहीद हुए जवानों के छह गांव और सेना में शहीद होने वालों के तीन गांव का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। साथ पिछड़े गांव सहित मिलाकर 55 गांव की सूची शासन को गई है।
पर्यटन सहित 22 विभागों का होगा जिम्मा
शहीदों के गांव में पर्यटन विभाग शहीद द्वार बनाने का काम करेगा। इसके अलावा गांव में सौंदर्यीकरण सहित सौर ऊर्जा, सड़कें, बिजली आदि विकास कराएं जाएंगे। समग्र विकास योजना के तहत पर्यटन सहित 22 विभागों को गांव के कालाकल्प की जिम्मेदारी निभानी होगी।
शहीदों को मिलेगी पहचान
गांव के बाहर ही शहीद द्वार और अन्य सौंदर्यीकरण कराने का मकसद शहीदों को पहचान दिलाना है। जिससे बाहर से आने जाने वाले लोग भी उस गांव के शहीद को जान सके। इसमें अमरोहा ब्लॉक के देहरा, पापड़ी, जलालपुर नारायण, तुरमाफी और हसनपुर ब्लॉक के घरौट का चयन किया गया है। इसके अलावा जोया ब्लॉक के मालीपुरा, अमरोहा के अलीपुर कलां, धनौरा के फतेहउल्लापुर और अतरासी का प्रस्ताव भी भेजा गया है।
मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना के तहत गांव का विकास कराने के लिए जिले के 55 गांव का प्रस्ताव भेजा गया है। जिसमें शहीदों के नौ गांव भी शामिल हैं। शहीदों के गांव में शहीद द्वार सहित अन्य विकास कार्य कराएं जाएंगे।
-विक्रम सिंह, जिला विकास अधिकारी