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सर, मैं शिक्षक बन गई हूं, वापस ले लीजिए खाते में आई पेंशन की रकम

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महिला की ईमानदारी ने दूसरों को दिखाया आईना, चेक के जरिए किया भुगतान
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अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा। पति की मृत्यु के बाद दूसरी शादी कर ली और विधवा पेंशन ले रही है। इस तरह के मामले आपने सुने होंगे और देखे होंगे, लेकिन यहां प्रकरण अलग है। एक विधवा ने उन महिलाओं को आईना दिखाया है, जो सच्चाई छिपाकर सरकारी इमदाद ऐंठती हैं। उसने अफसरों के दर पर जाकर सच्चाई बताई है। कहा है कि वह शिक्षक बन गई है। इसलिए उसकी विधवा पेंशन बंद कर दी जाए। विधवा ने चेक के माध्यम से खाते में आई पेंशन की धनराशि को वापस कर दिया। विधवा की ईमानदारी को देखते हुए अधिकारियों ने कहा कि पहली बार कोई महिला पेंशन बंद कराने आई है।
कस्बा गजरौला के मोहल्ला शास्त्रीनगर निवासी अंशु के पति दिनेश कुमार की कई साल पहले मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद उसने विधवा पेंशन के लिए जिला प्रोबेशन विभाग में आवेदन किया था। इसके बाद उसकी पेंशन मंजूर हो गई थी। हर माह 500 रुपये खाते में आ भी रहे थे। अपनी मेहनत के बूते महिला ने आगे की पढ़ाई की। बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक की नौकरी हासिल की। उसकी तैनाती जनपद सीतापुर में हुई है। अब जब उसको पता चला कि पेंशन खाते में आ रही है, तो उसने जिम्मेदार नागरिक का फर्ज अदा किया। हकदार को पेंशन मिले, इसी सोच के साथ विकास भवन स्थित प्रोबेशन विभाग पहुंची। यहां पर उसने डीपीओ को बताया कि सर, अब मुझे पेंशन नहीं चाहिए। मेरी नौकरी लग गई है। शिक्षक बन गई हूं। इसलिए पेंशन बंद करा दीजिए। मुझे पता भी नहीं है कि पेंशन आ रही है या नहीं। उसकी यह बात सुनकर डीपीओ ने भी खाता चेक किया। 6300 रुपए पेंशन के खाते में मिले। इस पर शिक्षिका ने धनराशि चेक के जरिए विभाग को वापस कर दी।
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महिला आई थी, उसने बताया कि शिक्षक बन गई है। इसलिए पेंशन बंद करानी है। सच्चाई बताने पर उसकी पेंशन बंद करा दी है। खाते में पहुंची पेंशन की राशि उसने चेक के जरिए वापस कर दी है। वाकई उसका यह कार्य काबिलेतारीफ है। वह पहली महिला है जो खुद पेंशन बंद कराने आई है। उसके दो बच्चे हैं।
अतुल कुमार सोनी, जिला प्रोबेशन अधिकारी
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