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कलक्ट्रेट में हजारों किसानों ने हल्ला बोला, पूरा शहर जाम

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बिजनौर। अपनी किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए हजारों किसानों ने सोमवार को कलक्ट्रेट में हल्ला बोल दिया। ट्रैक्टर-ट्रॉली व गाड़ियों के काफिले के साथ हजारों किसान पुलिस के बैरियर एक ओर फेंकते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे और धरना दिया। किसानों ने चकबंदी विभाग को चोरों और डाकुओं का अड्डा बताते हुए कार्यालय पर ताला जड़ दिया। इस दौरान किसानों की एडीएम प्रशासन व एडीएम न्यायिक से नोकझोंक भी हुई। किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झूठा बताते हुए उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की भी मांग की। बाबा टिकैत की प्रतिमा तोड़ने वाले के जल्द गिरफ्तार न होने पर भाकियू द्वारा पुलिस कप्तान को गिरफ्तार करने का ऐलान कर दिया। करीब साढ़े पांच बजे धरना समाप्त करने का एलान किया गया।
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भाकियू पदाधिकारियों ने अपनी 18 मांगों को पूरा कराने के लिए एक ज्ञापन 21 अगस्त को प्रशासन को सौंपा था। मांगे पूरी न होने पर कलक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन करने की चेतावनी दी थी। मांगें पूरी न होने पर सोमवार को जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह के नेतृत्व में किसान नगीना रोड स्थित रशीदपुर गढ़ी गांव के पास एकत्र हुए। करीब पौने 12 बजे किसानों के हुजूम ने नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट कूच किया। किसानों की भीड़ के चलते सड़कों पर जाम लग गया। किसानों को रोकने की औपचारिकता पूरी करने के लिए पुलिस लाइन के पास लगाए गए बैरियर को किसानों ने एक ओर फेंक दिया। किसानों ने प्रदर्शनी चौक पर ट्रैक्टर-ट्राली खड़ी करके जाम लगा दिया। पुलिस द्वारा बंद किए गए कलक्ट्रेट गेट को धक्का देकर खोलते हुए किसान करीब सवा 12 बजे कलक्ट्रेट पहुंचे। वक्ताओं ने किसानों की खराब हालत के लिए सरकारों व जिले के अधिकारियों को जमकर अपने निशाने पर लिया। चकबंदी कार्यालय की तालाबंदी करने पहुंचे किसानों का एडीएम प्रशासन व एडीएम न्यायिक ने विरोध किया तो किसानों की उनसे तीखी नोकझोंक हुई, लेकिन किसानों ने विभाग में तालाबंदी कर ही दी। जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह ने कहा कि किसानों को लुभाने के लिए देश के प्रधानमंत्री ने बिजनौर की जमीन पर झूठ बोला। हिंदू-मुस्लिम में कोई मरता है तो उसे 25 लाख रुपये दिए जाते हैं, लेकिन देश की जनता का पेट भरने के लिए कोई किसान कुएं में डूबकर मर जाता है तो उसे 25 रुपये भी नहीं मिलते हैं। उन्होंने कहा कि जिले के डीएम और दूसरे नेता किसानों से झूठ बोलते हैं। भाकियू का मकसद है कि डौल पर बैठने वाले हर किसान की समस्या खत्म हो। जिले के कप्तान साहब मंत्री से अपनी बात कहने के लिए उनकी गाड़ी रोकने वाली जनता को घर से उठाने में पूरा प्रशासन लगा देते हैं, लेकिन अपने दरोगा की हत्या का केस नहीं खोला गया। धरने की अध्यक्षता हृदय सिंह तथा संचालन कुलदीप सिंह व नरदेव सिंह ने किया। भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष धर्मवीर सिंह धनकड़, प्रदेश उपाध्यक्ष बलराम सिंह, रामअवतार सिंह, अतुल कुमार, गजेंद्र ठाकुर, बाबूराम तोमर, वीरसिंह डबास, कुलदक्सिंह, नरदेव सिंह, लक्ष्मी नारायण आदि किसान मौजूद रहे।
ये हैं मांगें
- कृषि बीमा योजना का प्रीमियम सरकार खुद भरें।
-बिजली की बढ़ी दरें तुरंत कम हों।
-सभी किसानों का शत प्रतिशत कर्ज माफ हों।
-गन्ना मूल्य रंगराजन कमेटी के अनुसार न तय हों।
-बिलाई शुगर मिल द्वारा गन्ना भुगतान ब्याज सहित मिलें।
-फसलों के दाम लागत में 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़कर दिए जाएं।
-गन्ना सप्लाई पर्ची वितरण का अधिकार समितियों को मिलें।
-चीनी मिलों की क्षमता बढ़ें, एक नई मिल लगे व गन्ना शोध केंद्र स्थापित हों।
-जिले को सूूखाग्रस्त घोषित करें।
-बाढ़ से कटी जमीनों का मुआवजा मिलें।
-बाढ़ से बचाव को तटबंध बनें।
-यूूकेलिप्टस व पॉपुलर को बिना परमिशन काटने, बेचने का अधिकार मिलें।
-बिजली लाइन चोरी होने की एफआईआर दर्ज हों।
-थानाध्यक्ष रेहड़ को हटाया जाएं।
-नहरों में पानी छोड़ा जाएं।
-फुंके ट्रांसफार्मर 48 घंटे में बदलें, जर्जर लाइन हटाएं।
-जर्जर लाइनों से हुए नुकसान की भरपाई 14 दिन के अंदर हों।
-सरकारी अस्पतालों में चिकित्सक तैनात हों।
-शिक्षामित्रों की समस्या का शीघ्र निपटारा हों।
-निजी स्कूलों में फीस आदि की मनमानी पर रोक लगें।
-चकबंदी विभाग में भ्रष्टाचार खत्म हों।
-खनन के नाम पर किसानों का शोषण न हों।

मांग पूरी करने का आश्वासन
प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को ढाई बजे वार्ता के लिए बुलाया, लेकिन कुछ देर में ही बिजली संबंधी मांगों को लेकर वार्ता विफल हो गई। अधिकारियों ने कुछ देर बार किसानों को फिर बुलाया और मांग पूरी करने का आश्वासन दिया।
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कलक्ट्रेट में पैर रखने का भी नहीं थी जगह
किसानों के प्रदर्शन में काफी भीड़ उमड़ी। एक अनुमान के अनुसार धरने में 500 से अधिक ट्रैैक्टर-ट्रॉली व चौपहिया वाहन आए थे। पांच हजार से ज्यादा किसानों की भीड़ आई। कलक्ट्रेट में पैर रखने की जगह बाकी नहीं रही। किसानों का काफिला इतना लंबा था कि एक जब किसान कलक्ट्रेट पहुंचे तो धरने आखिरी ट्रैक्टर धरनास्थल से दो किलोमीटर से ज्यादा दूर रेलवे फाटक के पास ही था। किसानों का काफिला 12 बजे से डेढ़ बजे तक शास्त्री चौक से गुजरा।

किसानों के काफिले से शहर जाम
किसानों के काफिले ने पूरे शहर को जाम कर दिया। हर सड़क पर जाम लगा रहा। रोडवेज की बसों का रूट मंडावर रोड की ओर डायवर्ट किया गया, लेकिन इससे भी जाम से मुक्ति नहीं मिली। जाम के कारण जनता बेहाल रही। स्कूली बच्चों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ी। हाल ये रहा कि जगह जगह जाम के कारण रिक्शा व अन्य वाहन स्कूल समय से नहीं पहुंच सके। प्रदर्शनी चौक, जजी चौक व शास्त्री चौक पर जाम से बुरे हालात रहे। यहां से गुजरने वाले राहगीरों को भारी मशक्कत उठानी पड़ी। कुछ साइकिल सवार तो साइकिल हाथों से ऊपर उठाकर जाम किसी तरह पार कर बाहर निकले। जाम से महिलाओं को भी भारी दिक्कतें हुईं। कलक्ट्रेट रोड पर भीड़ को देखते हुए बाद में पुलिस ने इस रोड के दोनों ओर बैरियर लगाते हुए बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी। कलक्ट्रेट के पास भी कुछ युवकों ने ट्रैक्टर ट्राली सड़क के बीच में खड़ी कर जाम लगा दिया, लेकिन पदाधिकारियों के कहने पर थोड़ी देर बाद ही जाम खुल गया।
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