नजीबाबाद। हर एक भारतीय के जीवन में स्वतंत्रता दिवस के बड़े मायने होते हैं। मगर ऐसे लोग विरले ही होते हैं, जो इस दिन विशेष पर पगभ्रमित लोगों को सही राह पर ले जाने की कोशिश करते हैं। उनमें से एक हैं नजीबाबाद के रवि कपूर। राष्ट्रीय पर्वों पर कागज व पॉलीथिन के तिरंगे का उपयोग न करने के लिए रवि कपूर बीते डेढ़ दशक से लोगों को प्रेरित कर रहे हैं।
रवि की तमन्ना दिल से समझना, इतनी सी बात हवाओं को बताए रखना, लहू देकर जिसकी हिफाजत शहीदों ने की, प्यारे तिरंगे को दिल में बसाए रखना...। इन पंक्तियों के साथ रवि कपूर समाज को राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान बनाए रखने के लिए निकल पड़ते हैं। केवल शब्दों से नहीं रवि कपूर आकर्षक राष्ट्रीय पर्व की शुभकामना के कीमती कार्ड छपवाते हैं। उस पर देशभक्ति की स्वरचित रचनाओं के प्रेरक प्रसंग होते हैं। रवि कपूर का सबसे अधिक जोर बाजारों में बिकने वाले कागज व पॉलीथिन से बने तिरंगा झंडों का प्रचलन रोकने पर होता है। उनका मानना है कि नादान बच्चे इन झंडों को आकर्षण के रूप में खरीदते हैं। इस्तेमाल होने के बाद झंडों को बेदर्दी से सड़कों और नालियों में फेंक दिया जाता है, जिससे तिरंगे का अपमान होता है।
रवि कपूर का कहना है कि बालक तो हैं नादान, आप न बनो अंजान, राष्ट्र ध्वज है देश की शान, मत होने दो इसका अपमान...। उनके इस वाक्य से शिक्षक और विद्यार्थी जागरूक होते हैं, लेकिन बाजारों में झंडों का प्रचलन जारी है। इतना ही नहीं रवि कपूर राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और बाजारों में आने वाले कागजी तिरंगे झंडों के प्रचलन को रोकने के लिए पिछले डेढ़ दशक से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर प्रचलन रोकने का अभियान चला रहे हैं।