फोरलेन निर्माण के लिए आया 3500 मीट्रिक टन मैटेरियल फेल
धामपुर। देहरादून-काशीपुर फोरलेन निर्माण कर रही पीएनसी ने अधोमानक पाए जाने पर 3500 मीट्रिक टन मैटेरियल फेल कर दिया। इस माल को वापस करते हुए सप्लाई कंपनी को वर्क आर्डर कैंसल करने की चेतावनी दी गई है। साथ ही कंपनी को नोटिस भी भेजा गया है।
पीएनसी कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर मनोज कुमार ने बताया कि अब तक कंपनी लैब में हुई जांच में 3500 मीट्रिक टन मैटेरियल फेल निकल चुका है। इस बाबत सप्लायर को भी चेता दिया है कि यदि मैटेरियल मानक अनुरूप नहीं आया, तो उसके वर्क आर्डर को निरस्त कर किसी दूसरे सप्लायर से मैटेरियल मंगाना शुरू कर दिया जाएगा। इस मामले में सप्लायर को नोटिस भी जारी किया जा चुका है।
गौरतलब है कि यहां पर पीएनसी कंपनी की ओर से देहरादून से लेकर काशीपुर तक 98 किमी एनएच 74 फोरेलेन का निर्माण किया जा रहा है। इस मार्ग में मैटेरियल प्रयुक्त करने को रैकों द्वारा पंचकुला (हरियाणा) से मंगाया जा रहा है। पिछले दिनों शिकायत मिली थी कि कंपनी के अधिकारी जांच में फेल मैटेरियल को मार्ग निर्माण में प्रयुक्त कर रहे हैं। जबकि ऐसा नहीं है। मैटेरियरल की जांच दो स्तर पर होती है। कंपनी स्तर की हुई जांच के बाद अब तक फेल हो चुके करीब 3500 मीट्रिक टन मैटेरियल को निरस्त किया जा चुका है। इस संबंध में सप्लायर को नोटिस जारी कर दिया गया है। हिदायत दी गई है कि यदि सप्लायर ने मानक अनुरूप मैटेरियल की सप्लाई नहीं की तो उसका वर्क आर्डर निरस्त कर दिया जाएगा।
मैटेरियल को दो स्तरों पर होती है जांच
पीएनसी कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि जो मैटेरियल जांच में उनकी लैब से फेल हुआ है। उसे सप्लायर को वापस कर दिया है। मैटेरियल को दो स्तरों पर जांच होती है। एक तो उनके स्तर से और दूसरे एनएचएआई द्वारा नियुक्त कंसलटेंट एजेंसी के अधिकारियों से। दोनों की मानक अनुरूप समान रिपोर्ट आने पर ही उस मैटेरियल को निर्माण में प्रयुक्त किया जाता है।
1200 करोड़ में 2019 तक बनेगा 98 किमी फोरलेन
प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि पीएनसी कंपनी को करीब 98 किमी. लंबा फोरलेन निर्माण करना है। छह माह से कार्य चल रहा है। इनमें से टुकड़ों में अभी तक केवल 35 किमी लंबे मार्ग फाइनल स्टेज पर आ पाया है। इस मार्ग के निर्माण पर करीब 1200 करोड़ का खर्चा आने का अनुमान है।
रिजेक्ट मैटेरियल से कंपनी को कोई लेनादेना नहीं
प्रोजेक्ट मैनेजर ने यह भी बताया कि कंपनी की ओर से जांच में फेल किए मैटेरियल को सप्लायर कहां ले जाकर स्टॉक कर रहा है। इससे कंपनी को कोई लेनादेना नहीं है। उनके द्वारा मैटेरियल को फेल कर दिया गया है। अब वह इसे कहीं लेकर जाएं, इसमें उनकी कोई जवाबदेही नहीं है।