बिजनौर। एक साल पहले सांप्रदायिकता की आग में सुलगे गांव पेद्दा के लोगों के जख्म एक साल बाद भी हरे हैं। दोनों संप्रदायों में दूरियां नहीं मिट पाई हैं। दोनों के जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश भी नहीं हुई है। आलम यह है कि दोनों संप्रदाय के लोग अभी भी एक दूसरे की खुशी व गम में शरीक नहीं हो रहे हैं। मुस्लिम जहां अभी भी इंसाफ मिलने की आस लगाए बैठे हैं तो दूसरे पक्ष के लोगों को अपने परिजनों के जेल से बाहर आने का इंतजार है। गांव में सब लोग पहले की तरह अपने काम काज में जुटे हैं। किसी को किसी से कोई लेना देना नहीं है। एक साल बाद लोगों की जुबान पर घटना का जिक्र जरूर है।
शहर कोतवाली क्षेत्र का गांव पेद्दा 16 सितंबर 2016 को युवती से छेड़खानी को लेकर सांप्रदायिक आग में सुलग गया था। दो संप्रदाय के लोग आमने सामने आ गए थे। एक संप्रदाय के लोगों ने लाइसेंसी बंदूक व राइफल से गोलियां बरसाकर एक ही परिवार के अहसान, उसके भाई अनीसुद्दीन व भतीजे सरफराज को मौत के घाट उतार दिया था। पड़ोस के गांव के लोग भी इस विवाद में कूद पड़े थे। दोनों पक्षों में पथराव भी हुआ था। इस घटना में मृतक पक्ष के 12 लोग घायल हुए थे। घटना को लेकर क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया था। इस घटना को लेकर आला अफसरों के हाथ-पांव फूल गए थे। लखनऊ तक से अधिकारियों ने पेद्दा में डेरा डालना पड़ा था। इस मामले में संसार सिंह, उसका बेटा नितिन, राजू, पप्पन, नरेश, टीकम सिंह, उसका पुत्र तेजपाल, कोमन, पंकज, अनुज, सतीश, मलखान, प्रेम, बिल्लू, रिंकू, सोनू, कक्कू, ओमपाल, राजपाल, अनिल कुमार, मनोज, टीशु, आकाश निवासी पेद्दा, कछपुरा के प्रधान दिलावर सिंह, उसका पुत्र बिट्टन, नयागांव निवासी कुंवर सेन, बिल्लू व दो होमगार्ड के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। बाद में भाजपा नेता व वर्तमान भाजपा विधायक सुचि चौधरी के पति ऐश्वर्य चौधरी, व्यवसायी अरुण कबाड़ी व गांव फरीदपुर भोगी निवासी कार्तिक के नाम भी रिपोर्ट में बढ़ाए गए थे। करीब सभी आरोपी सलाखों के पीछे हैं।
गोलियों के निशान खूनी खेल की बयां कर रहे दास्तान
शनिवार को इस घटना को एक साल हो जाएगा। गांव में एक साल बाद भी गोलियों के निशान खूनी खेल की दास्तान बयां कर रहे हैं। मृतक अनीसुद्दीन व अहसान के परिवार में उनकी बूढ़ी मां हसीना घर में एक चारपाई पर बैठी थी। अनीसुद्दीन की पत्नी जरीना, अहसान की पत्नी आबिदा अन्य महिलाओं के साथ घर में अलग बैठी मिलीं। जरीना व पड़ोस के जमील अहमद ने कहा कि पेद्दा में जब घटना हुई तब तो परिवार की किसी सदस्य ने बदला लेने के लिए गोली नहीं चलाई। परिवार में एक पुरुष फुरकान बचा था तो उसे भी नया गांव के विशाल हत्याकांड में नामजद कर दिया गया। घर में महिलाओं व बच्चों के अलावा कोई नहीं है। जरीना ने अपनी ढाई साल की बेटी इंशा के पैरों पर छर्रों के निशान दिखाए। कहा कि मासूम बच्ची तक पर तो गोलियां दागी गईं। कहा कि दूसरे पक्ष के लोग इस घटना के बाद मेलजोल नहीं रखते और न ही आते जाते हैं। एक साल से दोनों समुदायों में दूरियां बनी हुई हैं। दोनों का एक दूसरे के यहां आना जाना नहीं है। शादी ब्याह में भी नहीं आते जाते। दूसरे पक्ष के लोगों ने बस समझौते की तो बात की है। घटना के आठ-दस दिन बाद तक उनके चूल्हे बुझे रहे, कोई रोटी देने तक नहीं आया। उनके घरों पर बारिश की तरह गोलियां बरसाई गईं।
अब तक दिल नहीं मिले
पड़ोस में कुटुंब के परचून की दुकान करने वाले फुरकान ने कहा कि दोनों समुदायों के घटना के बाद से दिल नहीं मिले हैं। सलाखों के पीछे बंद गांव के 70 साल के प्रेमचंद के घर के बाहर उसका बेटा सुशील, गांव के नरेंद्र, ब्रह्मपाल व छोटे के साथ काम करता मिला। उन्होंने बताया कि घटना के बाद से दोनों समुदायों के लोगों के जख्म नहीं भरे हैं। दोनों खेमों में खाई बहुत चौड़ी हो गई है। इसे भरने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है। एक दूसरे के सुख दुख में कोई शरीक नहीं हो रहा है। वह तो इस इंतजार में है कि कब जेल से बाहर आएंगे। इनके अलावा यही बात जेल में बंद अन्य लोगों के परिजनों की है। वह भी चाहते हैं कि उनके परिव्वार के लोग जेल से बाहर आ जाएं।
पर दूसरा पक्ष नहीं हुआ तैयार
गांव के 90 साल के चतर सिंह अपने घर के बाहर गेट पर चारपाई पर आराम करते मिले। चतर सिंह का बेटा ओमपाल जेल में बंद है। चतर सिंह व उनकेे पोते अमन ने बताया कि गांव में दोनों समुदायों में घटना के बाद मेलजोल नहीं बढ़ा है। फैसले को लेकर जरूर बात चली, पर दूसरा पक्ष तैयार नहीं हुआ।
मंजर याद करके कांप उठती है रूह
पेद्दा गांव में दिन निकलते ही अपने कामकाज में जुट जाते हैं। गांव में हालात पहले की तरह हैं। दुकान हों या घर सब अपने काम में लगे हैं। इतना जरूर है कि लोग एक साल बाद भी इस घटना को नहीं भूल पाए हैं। लोगों की आंखों के आगे अभी भी एक साल पुराना मंजर आ जाता है, जिसे याद करके उनकी रूह कांप उठती है। गांव के चौराहे व दुकान पर कई लोग इस घटना का जिक्र करते मिले।
तीन हत्या के बाद घर लगाए सीसीटीवी कैमरे
पेद्दा में घटना के बाद से अहसान, अनीसुद्दीन व सरफराज की हत्या के बाद परिजनों ने अपने घरों पर सीसीटीवी कैमरा लगवा लिया है। ताकि सभी तरह की घटना कैमरे में कैद हो सके। छत की बाउंड्रीवॉल भी नए सिरे से ऊंची करा ली है। गली के बाहर बड़ा गेट भी लगवा लिया है। ताकि किसी भीड़ के हमला करने पर गेट को बंद किया जा सके।
हिंदू संगठनों का वादा निकला झूठा, नहीं की मदद
पेद्दा कांड में आरोपी पक्ष की पैरवी करने वाले हिंदू संगठन के लोग आरोपियों के जेल जाने के बाद परिजनों की मदद ही करना भूल गए। इस कांड में एक परिवार से दो-दो सदस्य भी जेल में बंद हैं। एक परिवार के तो तीन सदस्य जेल में हैं। घटना ।के बाद हिंदू संगठन के लोगों ने आरोपियों के परिजनों की आर्थिक मदद करने का ऐलान किया था। इसके लिए धन भी इकट्ठा किया गया, पर किसी परिवार की कोई मदद नहीं हुई। प्रेमचंद के मकान पर मौजूद उनके बेटे सुशील, ब्रह्मपाल, नरेंद्र व छोटे ने बताया घटना के बाद थोड़े बहुत पैसे की एक दो बार हिंदू संगठन के लोगों ने मदद की। उसके बाद किसी ने कोई पैसा नहीं दिया। यहां तक कि किसी ने उनके घर की ओर झांकना तक गंवारा नहीं किया।
एक बार भी नहीं आईं गांव
घटना में आरोपी बनाए गए भाजपा नेता ऐश्वर्य चौधरी की पत्नी भाजपा से विधायक बन चुकी हैं। उनको लेकर गांव वालों में बेहद गुस्सा है। गांव वालों का कहना है कि पेद्दा कांड की वजह से ही सुचि चौधरी विधायक बनीं। विधायक जीतने के बाद एक बार भी उनके गांव नहीं आईं। किसी पीड़ित परिवार की उन्होंने सुध नहीं ली। विधायक ने यह भी नहीं सोचा है कि इस कांड की वजह से वह विधायक बनी हैं। अब उन्हें विधायक से मदद की कोई उम्मीद नहीं है।