बिजनौर। कुपोषण को खत्म करने के लिए डीएम जगतराज और सीडीओ डा. इंद्रमणि त्रिपाठी ने जिले में अनूठी पहल शुरू की है। गांवों में राशन डीलर से लेकर प्रधानाध्यापक तक अति कुपोषित बच्चों को गोद लेंगे। इसके अलावा किशोरियां गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य का ध्यान रखेंगी। इनको अभियान में शामिल करने से विभाग की कार्यक्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
बच्चों से कुपोषण को खत्म करना बड़ी चुनौती है। इसके अलावा जिले में एनिमिया पीड़ित गर्भवती महिलाओं की संख्या भी करीब 25 प्रतिशत है। केवल 14 प्रतिशत महिलाएं ही अपने बच्चे के जन्म के एक घंटे के अंदर उसे अपना दूध पिलाती हैं। जिले में 3236 आंगनबाड़ी और इतनी ही सहायिकाएं हैं। प्रशासनिक कार्यों में भी इनकी ड्यूटी लगाई जाती है। इन सबके चलते आंगनबाड़ी और सहायिकाएं कुपोषण के खिलाफ लड़ाई पर पूरी मुस्तैद नहीं हो पाती हैं। इसे देखते हुए डीएम और सीडीओ ने जिले में अनूठी पहल नाम से अभियान शुरू किया है। अभियान में आंगनबाड़ी, सहायिका, ग्राम प्रधान, प्रधानाध्यापक, राशन डीलर, एएनएम, आशा एक-एक अतिकुपोषित बच्चे को गोद लेंगी। इसके अलावा हर आंगनबाड़ी केंद्र क्षेत्र में दस-दस किशोरियों का समूह बनाया जाएगा। इन किशोरियों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। प्रशिक्षण मिलने के बाद ये किशोरियों गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य का ध्यान रखेंगी।
बच्चे के जन्म के एक घंटे के अंदर बच्चे के लिए मां का दूध अमृत तुल्य होता है। इस दूध में कोलोस्ट्रोम, विटामीन, प्रोटीन, पानी आदि पर्याप्त मात्रा में होता है। जागरूकता के अभाव में महिलाएं इस दूध को गंदा समझकर बच्चों को नहीं पिलाती हैं। जबकि यह दूध बच्चे का पहला टीका माना जाता है।
जिले में 16 हजार 582 अति कुपोषित बच्चे
जिला कार्यक्रम अधिकारी दीप्ति भार्गव के अनुसार जिले में अनूठी पहल अभियान शुरू किया गया है। बच्चों को गांव से जुड़े लोगों को गोद दिया जाएगा और किशोरी गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करेंगी। इस अभियान से विभाग की कार्य करने की क्षमता बहुत बढ़ जाएगी।