सामान्य निकाय की सभा में हंगामा
धामपुर। सहकारी गन्ना विकास समिति की सामान्य निकाय की सभा में किसान डेलीगेटों के शोर शराबे के बीच 37,95257 रुपये के लाभांश का बजट पास हुआ। सभा में सदस्यों ने किसान समस्याओं का निदान न होने पर कई बार हंगामा किया। आरोप है कि समिति के बाबू किसी काम को बताने पर उसे करना तो दूर सम्मान तक देना जरूरी नहीं समझते। सदस्यों ने सदन में कई समस्याओं को दमदार तरीके से उठाया और उसका निदान कराने की मांग की।
आरएसएम इंटर कॉलेज के हॉल में संपन्न सभा में सबसे पहले गन्ना समिति के बोर्ड में शामिल सभापति और उनकी केबिनेट के सभी पदाधिकारियों, सदस्यों को समिति की ओर से जो निमंत्रण पत्र उपलब्ध कराया गया है उस पत्र में समिति के बाबुओं ने उनके पद नाम को सही नहीं लिखा। जिसे लेकर सदन में काफी देर तक हंगामा हुआ। सभापति कुशलपाल सिंह ने कहा कि जब वह और उनका बोर्ड में शामिल डायरेक्टर साधारण डेलीगेट के रूप में हैं तो वह इस सभा की अध्यक्षता नहीं करेंगे। समिति सचिव मनोज कुमार के आग्रह पर सभापति केबिनेट के साथ मंच पर आसीन हुए। इस दौरान अनेक समिति सदस्यों ने आरोप लगाया कि समिति का बोर्ड महत्वपूर्ण होता है। बोर्ड में शामिल सदस्यों और पदाधिकारियों को कोई वेतन नहीं मिलता है। केवल पद ही उनका मान सम्मान होता है यदि निमंत्रण पत्र में समिति के बाबूओं द्वारा उनके पदों का उल्लेख नहीं होगा तो ये उनका अपमान है। समिति के सचिव से ऐसे बाबुओं पर कार्रवाई किए जाने की मांग की।
किसानों ने उठाया गन्ना मूल्य भुगतान का मुद्दा
धामपुर समिति में धामपुर चीनी मिल, स्योहारा, बिलाई और अफजलगढ़ के कुल 106 गन्ना क्रय केंद्र हैं। किसानों ने गन्ना मूल्य भुगतान में होने वाली समस्याओं को लेकर बखेड़ा कर दिया। आरोप लगाया कि जब पहले किसानों का भुगतान पंजाब नेशनल बैंक से होता आया है तो अब प्राइवेट बैंकों से उनका भुगतान क्यों कराया जा रहा है। गजराज सिंह ने आरोप लगाया कि जब गन्ना समिति ई-टेंडिरिंग के माध्यम से रखे पर्ची वितरकों को पांच हजार रुपये प्रति माह ठेकेदार को दे रही है तो ठेकेदार पर्ची वितरकों को 3750 रुपये क्यों दे रहा है। सदन में सदस्यों ने ई-टेंडरिंग व्यवस्था को समाप्त कर इन सभी पर्ची वितरकों को समिति के आधीन करने का प्रस्ताव करने का पास किया गया।
सरकार पर समितियों की उपेक्षा का आरोप
भाकियू ब्लॉक अध्यक्ष दुष्यंत राणा ने आरोप लगाया कि सीमा पर जवान और देश में किसान आए दिन मरता जा रहा है, लेकिन इनकी कोई सुध नहीं ले रहा है। पूर्व सभापति रामनारायण सिंह ने आरोप लगाया कि गन्ना समितियों में बोर्ड को किसान गन्ना संशोधन से लेकर मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी देने का हक होना चाहिए, लेकिन उनके इसके हक को डीसीओ और डिप्टी केन कमिश्नर भेंट चढ़ा रहे हैं। बोर्ड केवल औपचारिक बनकर रह गया है। जबकि गन्ना समितियों की तरक्की के लिए सरकार का कोई योगदान नहीं होता है। सचिव मनोज कुमार सदन को सरकार द्वारा चलाई जा विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी। कहा कि जो किसान ओटीएस के तहत 31 मार्च तक अपना ऋण अदा करेंगे तो सरकार की ओर से दी जाने वाली छूट दी जाएगी। अफजलगढ़ क्षेत्र के किसानों ने कम पर्ची आने का मुद्दा उठाया। इस दौरान राजीव कुमार, अनुपाल सिंह, यादराम, धर्म देव आर्य, रामनारायण सिंह, देवेंद्र कुमार गुप्ता, मनोज चौहान, अजय कुमार ढाका, नेमीशरण सिंह, अचल चौहान आदि रहे। अध्यक्षता सभापति कुशलपाल सिंह संचालन संचालन सचिव मनोज कुमार कौन्ट ने किया।
गन्ना परिषद के हस्तक्षेप से बचाने की मांग
सदस्यों ने आवाज उठाई कि जो बजट पास किया जा रहा है उस बजट में बैलेंस शीट शुद्धि पूर्ण नहीं है। अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष में बैलेंस शीट को शुद्धता के साथ बनाने, गन्ना परिषद के हस्तक्षेप को गन्ना समिति से पूरी तरह से समाप्त करने की मांग की। सदस्यों ने कहा कि जब किसानों को समिति का सदस्य समिति का अधिकारी बनाते हैं तो उसकी जमीन और गन्ने का सर्वेक्षण करने का अधिकार गन्ना परिषद के हाथ में होना किसान के साथ लूट खसौट का द्योतक है। वह किसी भी हालत में गन्ना परिषद के अधिकारियों के हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेंगे।