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जिले में गन्ने के रस से एथेनॉल बनाने की तैयारी शुरु

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जिले में गन्ने के रस से बनेगा एथनॉल
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बिजनौर। अब जिले में ब्राजील देश की तर्ज पर गन्ने के रस और शीरे से एथनॉल बनाने की तैयारी हैं। चीनी मिलों ने प्लांट लगाने का ब्लू प्रिंट बनाना शुरू कर दिया है। एथनॉल प्लांट इसी पेराई सीजन के मध्य तक चालू करने की योजना है। इससे किसानों को गन्ना भुगतान समय से होगा और चीनी मिलों की आय बढे़गी।
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार जिले में नौ चीनी मिल हैं। चीनी मिल बी हैवी शीरा बनाती हैं। वित्तीय वर्ष 2017-2018 मे चीनी मिलों ने दो लाख हेक्टेयर से अधिक गन्ना रकबे में पैदा गन्ने से 126.43 लाख क्विंटल चीनी बनाई। मिलों ने 47.43 लाख क्विंटल शीरा तैयार किया था। जिले में गन्ने की औसत रिकवरी 11.87 प्रतिशत रही। अब तक बी हैवी शीरे से ऐथेनॉल बनाने पर पाबंदी थी। किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान चीनी मिल चीनी बेचकर कर रही थी।
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केंद्र सरकार ने बी हैवी शीरे से एथनॉल बनाने को मंजूरी दे दी है। जिले मे शीरे से एथनॉल बनाना किसानों के लिए फायदेमंद होगा। चीनी के उत्पादन और उपभोग में अंतर कम होगा। किसानों को गन्ने का त्वरित पेमेंट होगा। ब्राजील गन्ना उत्पादन बाहुल्य देश है। वहां गन्ने के रस से सीधे एथनॉल बनता है। जिले में सबसे अधिक शीरा उत्पादन धामपुर चीनी मिल 10.63 लाख क्विंटल करता है। इसके बाद स्योहारा चीनी मिल 9.30 लाख क्विंटल शीरा तैयार करके दूसरे स्थान पर है।
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गन्ना विभाग के जिला सांख्यिकी अधिकारी विकल भारती के मुताबिक जिले में अभी कोई चीनी मिल एथनॉल नहीं बना रहा है। ऐथेनॉल का प्लांट लगाने में करीब 25 से 50 लाख लागत आती है। चीनी मिल प्लांट लगाने को तैयार हैं। विभाग ने जरूरी दिशा निर्देश दे दिए हैं। एथनॉल कैश में बिकेगा और चीनी मिलों को गन्ना भुगतान में सुविधा होगी। चीनी मिलों ने प्रारंभिक तैयारी शुरू कर दी है। शासन से अंतिम स्वीकृति मिलने पर तेजी आ जाएगी।
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