धामपुर। गन्ना विभाग की ओर से गन्ना समितियों में किसानों के फर्जी गन्ना बांड का पता लगाने के लिए जांच अभियान के रूप में शुरू कर दी है। समिति के कुल 58 हजार गन्ना उत्पादक हैं। अब तक की हुई जांच में एक हजार किसानों के बांड फर्जी निकले हैं। अभी जांच जारी है। किसानों की समस्या का निदान कराने के लिए विभाग की ओर से 20 से 30 सितंबर तक गन्ना समिति में बांड प्रदर्शन मेले का आयोजन होगा। इस मेले में किसानों की समस्याओं का निदान होगा। जिन किसानों ने स्वयं घोषणापत्र, आधार नंबर और जमीन की फर्द जमा नहीं की है, वह 20 सितंबर तक हर हाल में जमा कर दे।
गन्ना विकास परिषद के एससीडीआई अमित कुमार पांडेय ने कहा कि विभाग की ओर से गन्ने के सर्वे का काम तो पूरा हो गया है। सोमवार से किसानों को कच्चे पर्ची कलेंडरों का भी वितरण शुरू कर दिया जाएगा। कलेंडरों का वितरण 20 सितंबर से पहले करने का लक्ष्य है। 20 से 30 सितंबर तक गन्ना समिति में मेले का आयोजन होना है। इन मेलों के आयोजन करने का उद्देश्य केवल किसानों की गन्ना बांड संबंधी समस्याओं का निदान करना है। मेले के आयोजन के संबंध में गांवों में जाकर विभाग की ओर से प्रचार कराया जा रहा है, जिससे सभी किसानों को आसानी से पता लग सके। जिस किसी किसान का आधार नंबर ,स्वयं घोषणा पत्र और फर्द मिस है। उनके इन प्रपत्रों को कंप्यूटर में फीड कर अपडेट किया जाएगा, जिससे किसी को दिक्कत न हो।
एससीडीआई ने बताया कि गन्ना विभाग की ओर से फर्जी गन्ना उत्पादकों का पता लगाने को जांच की जा रही है। समिति के कुल 58 हजार गन्ना उत्पादक है। अब तक हुई जांच में 540 ऐसे किसानों के सट्टे मिले। जिनकी कई साल पहले मौत हो चुकी है और उनके सट्टे अब तक गन्ना समिति में चल रहे थे। 93 ऐसे गन्ना उत्पादक निकले। जिनके सट्टे एक ही नाम से कई कई चल रहे थे। 130 किसान ऐसे मिले, जो पूरी तरह से भूमिहीन है। इनके पास जमीन न होने के बाद भी इन लोगों के वर्तमान में सट्टे जारी थे। 174 किसान ऐसे पाए गए हैं। जिनके राजस्व विभाग के अभिलेखों के अनुरूप जमीन कम और गन्ना समिति में अधिक जमीन फीड कराकर बांड का संचालन किया जा रहा था। इन सभी बांड को तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया गया है। अभी 30 प्रतिशत ही बांड के सत्यापन का काम हो सका है। जांच जारी है। एससीडीआई ने बताया कि विभाग की ओर से सोमवार से किसानों को गन्ना बांड का कच्चे कलेंडर बांटने का काम शुरू कर दिया जाएगा।