जनपद के कई खिलाड़ी हॉकी में लहरा चुके हैं परचम
बिजनौर। जिले के कई खिलाड़ियों ने हॉकी में परचम लहराकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इनमें जम्मनलाल शर्मा, प्रवीण कुमार शर्मा, सौरभ विश्नोई, रजिया जैदी इंटनरेशनल स्तर पर खेल सफलता के झंडे गाड़ चुके हैं। रजिया जैदी ने भारतीय महिला हॉकी टीम की कमान संभालकर अपनी काबलियत को साबित किया है। इसके अलावा नेशनल में तो कई खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया है।
जनपद बिजनौर की माटी धरती पर जन्मे हॉकी के कई दिग्गजों ने अपनी काबलियत को साबित किया है। नेशनल स्तर पर पहुंचने वाले खिलाड़ियों की सूची में वरिष्ठ हॉकी खिलाड़ी एवं वर्धमान कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डा. वी.के. त्यागी, महेंद्रनाथ खन्ना, राजेश्वर प्रसाद, खालिद असरार आदि ने हॉकी खेलकर जनपद बिजनौर को पहचान दिलाई है।
वरिष्ठ हॉकी वी.के. त्यागी ने बताया कि मेजर ध्यानचंद 1974 में लखनऊ में मुजफ्फरनगर की ओर से लखनऊ खेलने गए थे। वहां पर बेहतरीन प्रदर्शन करने पर मेजर ध्यानचंद ने उनकी पीठ थपथपाई थी। इससे पूर्व वे आगरा एवं मेरठ यूनिवर्सिटी की ओर से खेले थे। उन्होंने नॉर्थ जॉन में भी करीब दस बार प्रतिभाग किया है। उनकी प्रेरणा से ही उन्होंने इस खेल में खूब पसीना बहाया। महेंद्रनाथ खन्ना के अनुसार उन्होंने 1952 में हॉकी खेल की शुरुआत की थी। इसके बाद वे स्कूल की टीम में खेले। जिला, प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर खेलकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। 1962 में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर आगरा यूनिवर्सिटी की ओर से खेलकर गोल्ड मेडल प्राप्त किया। करीब 15 साल तक उन्होंने बिजनौर स्टेडियम में राष्ट्रीय स्तर पर लालबहादुर शास्त्री प्रतियोगिता आयोजित कराई। करीब 25 साल तक प्रत्येक वर्ष यह प्रतियोगिता हुई। इसमें देश-विदेश की करीब 30-32 टीमें प्रतिभाग करती थीं। वहीं नेशनल हॉकी खिलाड़ी खालिद असरार कहते हैं कि वे 1958 से हॉकी खेलने शुरु हुए थे। 1977 में उन्होंने मेरठ हॉस्टल की ओर से ऑल इंडिया जूनियर खेलकर विजय पताका फहराई। इसके बाद दिल्ली की ओर से खेलकर पंजाब से हार गए। खालिद ने बताया कि वे हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक ध्यानचंद की कप्तानी में खेल चुके हैं। इसके बाद कदम दर कदम आगे बढ़ते गए और इंडियन एयर लाइंस की ओर से खेलकर विजयश्री प्राप्त की। सन 1981 में पिता की तबियत खराब होने पर उन्होंने हॉकी से सन्यास ले लिया।