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यपी के खनन वाहन ट्रांसपोर्टरों में हड़कंप

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भागूवाला/नजीबाबाद। उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों के वाहन अब उत्तराखंड वन विकास निगम की नदियों से खनिज संपदा का ढुलान नहीं कर सकेंगे। उत्तराखंड प्रशासन ने उत्तराखंड की नदियों में अन्य राज्यों के खनन वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। जिससे यूपी ट्रांसपोर्टरों और मजदूरों की आजीविका पर विराम लग गया है।
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उत्तराखंड वन विकास निगम की नदियों कोटावाली, गंगा एवं रवासन से खनन कार्य चल रहा था। उत्तराखंड प्रशासन ने यूपी एवं अन्य राज्यों से पंजीकृत वाहनों पर खनन सामग्री की निकासी करने पर रोक लगा दी। जिसके चलते शुक्रवार (आज) से यूपी व अन्य राज्यों के खनन वाहनों को नदी क्षेत्र में नहीं घुसने दिया जाएगा। उत्तराखंड प्रशासन के इस रुख से जहां रेत-बजरी के दाम बढ़ेंगे, वहीं विकास कार्य भी बुरी तरह प्रभावित होंगे। खनन सामग्री का ढुलान करने वाले उत्तराखंड से पंजीकृत वाहनों की संख्या बहुत कम है। जिससे खनन सामग्री की पूर्ति होना न के बराबर है।
यूपी के भागूवाला व आसपास के क्षेत्रों के ट्रांसपोर्टर अफजाल अहमद, भूरे, पुष्पेंद्र, विपिन कुमार, रियासत, शाबान, अमरजीत आदि का कहना है कि उत्तराखंड की नदियों से यूपी के ट्रांसपोर्टरों को रेत-बजरी लेने से रोकने से ट्रांसपोर्टर सड़क पर आ गए हैं। सभी ट्रांसपोर्टर कर्ज में दबे हैं। ऐसे हालात में कर्ज की अदायगी कर पाना संभव नहीं होगा। उनके पास जो वाहन हैं, वे केवल रेत-बजरी के ढुलान के लिए ही बनाए गए थे। उत्तराखंड वन विकास निगम रवासन नदी के सेक्शन इंचार्ज गिरीशचंद लखेड़ा का कहना है कि शुक्रवार सुबह से ही अन्य राज्यों के खनन वाहनों के उत्तराखंड की नदियों में प्रवेश पर रोक लग जाएगी। उन्होंने बताया कि उच्च प्रशासनिक अधिकारियों के आदेशों पर काम किया जा रहा है।
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