सेंटरों पर गन्ना खरीद में हो रहा है खेल
अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर।
सेंटरों पर गन्ना खरीद में बड़ा खेल हो रहा है। अर्ली प्रजाति के गन्ने के साथ रिजेक्ट प्रजाति का गन्ना मिलाकर बेचा जा रहा है। इससे जिले की रिकवरी पर असर पड़ने के साथ राजस्व भी प्रभावित होगा।
जिले की शुगर मिलों की रिकवरी प्रदेश में टॉप है। रिकवरी 11 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई है। शुगर मिलों की आमदनी बढ़ी है। किसानों को गन्ना मूल्य का समय से भुगतान हो रहा है। शासन ने गन्ने की रिजेक्टिड प्रजाति की खरीदारी पर पाबंदी लगा रखी है। आरोप है कि शुगर मिलों के गन्ना खरीद केंद्रों पर रिजेक्टिड प्रजाति का गन्ना धड़ल्ले से बेचा जा रहा हैं। रिजेक्टिड़ प्रजाति का गन्ना अर्ली प्रजाति के साथ मिलाकर बिक रहा है। अर्ली प्रजाति के गन्ने का रेट सामान्य प्रजाति के रेट सें दस रुपये प्रति क्विंटल अधिक है।
आरोप है कि गन्ना सप्लाई के अवैध धंधे से जुडे़ लोग रिजेक्टिड प्रजाति के गन्ने को खादर क्षेत्र से खरीद कर सप्लाई कर रहे हैं। आरोप है कि गन्ने की इस कालाबाजारी में कुछ प्रभावशाली किसान समेत कई कर्मचारी भी शामिल हैं। इससे विभाग को दोहरा झटका लग रहा है। एक ओर जहां सामान्य किसान के गन्ने की पेराई में संकट पैदा हो सकता है। वहीं जिला गन्ना रिकवरी में प्रदेश में पिछड़ सकता है। डीसीओ ओपी सिंह के अनुसार गन्ने की क्वालिटी को देखने का काम शुगर मिलों का है। रिजेक्टिड प्रजाति का गन्ना नहीं खरीदा जा सकता है। इससे गन्ना रिकवरी पर असर पड़ता है। शुगर मिलों को इस पर निगाह रखनी चाहिए। वह भी अपने स्तर से मामले की जांच कराएंगे।