बिजनौर में डाक विभाग में करीब 50 हजार खातों में कई साल से लेनेदेने नहीं हुआ है। इसका मुख्य कारण है कि उपभोक्ता डाक विभाग से ज्यादा बैंकों को वरियता दे रहे हैं और डाक विभाग में खुले खातों पर कोई ध्यान नहीं देते हैं। विभाग ने खातों को सक्रिय करना शुरू कर दिया है।
बिजनौर में डाक विभाग में करीब छह लाख खाते हैं। इनमें से करीब 50 हजार खाते निष्क्रिय हो गए हैं। इन खातों में करीब तीन साल से ज्यादा समय से कोई लेनेदेने नहीं हुआ है। 50 हजार खाते निष्क्रिय होने का कारण है कि उपभोक्ता को डाक विभाग से ज्यादा सुविधाएं बैंकों से मिल रही है, इसी कारण उपभोक्ता बैंकों को ज्यादा वरियता देते हैं। विभाग द्वारा ऐसे खातों को सक्रिय करने के लिए उपभोक्ताओं को नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं, कुछ उपभोक्ताओं ने नोटिस का जवाब दिया, लेकिन अधिकांश उपभोक्ताओं को कोई जवाब नहीं आता है।
इन खातों में उपभोक्ताओं का लाखों रुपये जमा हैं, इसके बाद भी उपभोक्ताओं इन खातों की और कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
इस कारण विभाग को वित्त मंत्रालय से खातों पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि भी कम की गई है।मुख्य डाक अधीक्षक एससी वर्मा ने बताया कि जिले में करीब 50 हजार खाते निष्क्रिय हो चुके हैं। खातों को सक्रिय करने के लिए उपभोक्ताओं को नोटिस जारी किया गया था, कुछ ही उपभोक्ताओं को नोटिस का जवाब आया है।