झंडापुर के पास झोपड़ी डालकर रह रहे खानाबदोश।
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बिजनौर के झंडापुर के पास 50 परिवार पिछले 15 साल से डेरा डालकर असम की आईडी पर रह रहे हैं। बोलचाल में इन सबकी भाषा बांग्लादेश के लोगों जैसी है। इन लोगों के पुरखे कहां के हैं, इन लोगों को नहीं मालूम। गजब तो यह है कि नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजन में इनका नाम दर्ज है। खुफिया जांच में इन बातों का खुलासा हुआ है। जांच पड़ताल कराने के लिए इनकी रिपोर्ट असम के आला अफसरों को भेज दी गई है।
बिजनौर में गंज मार्ग पर झंडापुर के पास पिछले 15 साल से 50 परिवार डेेरा डालकर रहते हैं। बच्चों से लेकर बड़े तक कबाड़ बीनकर परिवार की गुजर बसर करते हैं। इनकी भाषा बांग्लादेश के लोगों के जैसी है। इन लोगों की कभी जांच पड़ताल नहीं हुई। अफसर भी इस ओर से आंखें मूंदे रहे। इन डेरा डालकर रहने वाले परिवारों को सदैव शक की नजर से देखा जाता रहा है। लोग इन परिवार को बांग्लादेश का बताते रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के असम के 40 लाख लोगों को बाहरी बताने पर अमर उजाला ने झंडापुर के पास डेरा डालकर रहने वालों लोगों की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद खुफिया एजेंसी इन परिवारों की जांच पड़ताल में जुट गई। जांच के दौरान इन परिवारों के पास असम की आईडी मिली। इन लोगों ने जांच टीम को बताया कि नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजन में इनका नाम दर्ज है। बिजनौर में इतने सालों से क्यों रह रहे हैं ? इसका परिवारों के पास कोई जवाब नहीं है। इन परिवारों के पुरखे कहां के हैं इसका भी इन परिवारों को मालूम नहीं है। इन 50 परिवारों की जांच पड़ताल के लिए रिपोर्ट बिजनौर की अभिसूचना इकाई ने असम के आला अफसरों को बृहस्पतिवार को भेज दी है।
दो माह पहले भेजी रिपोर्ट का नहीं मिला जवाब
अफसरों की माने तो दो माह पहले झंडापुर के पास रहने वाले परिवारों की जांच कराने को रिपोर्ट असम के अफसरों को भेजी गई थी, लेकिन रिपोर्ट का कोई जवाब नहीं आया। झंडापुर के पास 50 परिवारों में बच्चों से लेकर बड़ो तक के 250 सदस्य हैं। इन परिवारों के पास भीख मांगने के अलावा कमाई का और कोई जरिया नहीं है। झंडापुर के पास ही नहीं पूरे जिले में ऐसे लोग अपने परिवारों के साथ डेरा डालकर रह रहे हैं। बिजनौर में रेलवे स्टेशन के पास भी इस तरह के लोग कई साल से डेरा डालकर रह रहे हैं। धामपुर, नजीबाबाद, झालू, चांदपुर समेत जिले मेें कई जगह ऐसे परिवार रहते हैं। इनकी कभी जांच पड़ताल नहीं होती।
भीख की रकम पर झालू में दे रखी है घरों मे पनाह
कस्बा झालू में तो भीख की रकम पर ऐसे लोगों को रहने के लिए कुछ लोग पनाह दिए हुई है। झालू में ऐसे तमाम लोग रेलवे स्टेशन के अलावा अन्य स्थानों पर डेरा डालकर रहे रहे थे। इन लोगों को अब कुछ लोगों ने अपने घरों में पनाह देनी शुरू कर दी है। दिन भर की मांगी गई भीख की रकम में हिस्सा लेकर ये लोग डेरा डालने वालों को घरों में पनाह दे रहे हैं। रोजाना भीख की रकम का हिस्सा इन लोगों से वे झटक लेते हैं।
बाकी डेरा डालने वालों की भी हो रही है जांच
एलआईयू इंस्पेक्टर अरुण कुमार यादव के मुताबिक असम की आईडी पर 50 परिवार डेरा जमा कर रहते मिले है। जांच के लिए इनकी रिपोर्ट असम के अफसरों को भेज दी गई है। बाकी लोग जो जिले में डेरा डाले है उनकी भी जांच कराई जा रही है।