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जिले के 44171 छात्र होंगे प्रमोट

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जिले के 44171 छात्र होंगे प्रमोट
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बिजनौर। कोरोना के कारण इंटर की परीक्षा भी नहीं होगी। छात्रों को प्री-बोर्ड परीक्षा तथा ग्यारहवीं के अंकों के आधार पर प्रमोट किया जाएगा। जिले के 387 विद्यालयों के 44171 छात्र-छात्राएं फैसले से प्रभावित हैं। शिक्षक फैसले को परिस्थितियों के अनुसार सही बता रहे हैं। साथ ही छात्रों को परीक्षा देने का विकल्प भी देने की बात कह रहे हैं।
शासन ने बारहवीं में पंजीकृत छात्र-छात्राओं के प्री-बोर्ड तथा कक्षा 11 के छमाही व सालाना परीक्षा के अंक पहले ही परिषद की वेबसाइट पर अपलोड करा लिए थे, तभी से परीक्षा निरस्त होने के कयास लग रहे थे। सीबीएसई परीक्षा रद्द होने के बाद यूपी बोर्ड की परीक्षा निरस्त होना तय माना जा रहा था। आज शासन ने यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट की परीक्षा रद्द कर दी है। जिले में यूपी बोर्ड के 387 विद्यालय है। जिले में वर्ष 2021 की इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा के लिए 41423 संस्थागत तथा 2748 व्यक्तिगत कुल 44171 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। परीक्षा निरस्त होने से मेधावी छात्र-छात्राओं में थोड़ी मायूसी है।
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खतरा अभी टला नहीं
किसान इंटर कालेज मंडावली की प्रधानाचार्य सुनीति त्यागी का कहना है कि कोरोना कम होने लगा है परंतु खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। जीवन परीक्षा से कहीं ज्यादा जरूरी है, इसलिए परीक्षा निरस्त करना ठीक है।
सही लिया गया निर्णय
जीजीआईसी बिजनौर में प्रवक्ता शर्मिला सिंह का कहना है कि इंटर की परीक्षा भी निरस्त होना ठीक है। कोरोना के कारण छात्रों की कक्षाओं में पढ़ाई कम हुई है। कहा कि अंक आवंटन की नीति सभी बोर्ड में समान हो ताकि मेरिट के आधार पर दाखिले में यूपी बोर्ड के छात्र पिछड़ न जाएं।
छात्रहित के लिए सही
बिजनौर इंटर कालेज के प्रधानाचार्य आफताब अहमद ने निर्णय को छात्र हित में बताते हैं। कहा कि सीबीएसई की तरह यूपी बोर्ड के छात्रों को भी यह विकल्प मिलना चाहिए कि वह अंक सुधार के लिए परीक्षा दे सके।
स्थिति सामान्य होने में लगेगा समय
बीआईसी में भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता शाहनवाज राशिद का कहना है कि कोरोना थमा नहीं है। सामान्य स्थिति होने में समय लगेगा। इंटर की परीक्षा रद्द होना ठीक है। अब प्रतियोगी परीक्षा का जमाना है, जिसमें अंक कम होने पर भी छात्र अपनी प्रतिभा दिखाता है।
परीक्षा निरस्त होना सही, परंतु विकल्प मिले
विशाल कुमार का कहना है कि स्कूलों में पढ़ाई हुई नहीं है। तनाव के माहौल में पढ़ाई होती नहीं है। इसलिए परीक्षा निरस्त सही है। शाहिस्ता परीक्षा निरस्त होने से थोड़ी मायूस हैं। कहती हैं कि उसने कक्षा एक से ही सालाना परीक्षा में बढ़िया नंबर प्राप्त किए हैं। इसलिए स्नातक में अच्छे स्कूल में दाखिला लेने के लिए वह खूब मेहनत कर रही थी, लेकिन कोरोना तो खतरनाक बीमारी है। छात्रों को परीक्षा का विकल्प मिलना चाहिए।
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प्राइवेट परीक्षार्थी असमंजस
जिले में इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए 2748 छात्र छात्राओं ने पंजीकरण कराया है। इन छात्रों के अनुसार संस्थागत छात्रों को तो प्री-बोर्ड व ग्यारहवीं की छमाही व सालाना परीक्षा के आधार पर प्रमोट कर दिया जाएगा परंतु प्राइवेट छात्रों का क्या होगा। शासन को इस बारे में स्थिति साफ करनी चाहिए।
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