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धूल का गुबार क्षेत्रवासियों, राहगीरों के लिए बना परेशानी का सबब

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भागूवाला। कोटावाली नदी पर बनाया गया अस्थायी रपटा राहगीरों और क्षेत्रवासियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। रपटे से वाहनों के गुजरने के दौरान उठने वाली धूल से लोगों का आसपास से भी गुजरना खासा मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से क्षेत्र का निरीक्षण कर सुधार की मांग की है।
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कोटावाली नदी में उफान आने पर अगस्त में पुल के पिलर में तकनीकी खामी आ गई थी। इसके बाद प्रशासन ने पुल से भारी वाहनों का आवागमन रोक दिया था। अक्तूबर में नदी क्षेत्र में अस्थायी कच्चा रपटा बनाकर भारी वाहनों का आवागमन शुरू कर दिया गया, मगर यह स्थिति क्षेत्रवासियों और राहगीरों के लिए खाई दुखदाई होती जा रही है। रपटे के पास ही स्थित सीताराम आश्रम के महंत प्रभुनाथ मिश्रा का कहना है कि रपटे से लगातार वाहनों के गुजरने से हवा में हर समय धूल घुली रहती है, जिससे सांस लेने में भी दिक्कत महसूस होने लगी है। आश्रम में रहने वाले लोगों सुमित, राजेश आदि का कहना है कि अब तक हालात में सुधार के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है।
रपटे के नजदीक स्थित गांव भागूवाला निवासी ग्रामीणों विपिन कुमार, महबूब, हरिप्रकाश, पुष्पेंद्र, लक्ष्मण सिंह का कहना है कि अस्थायी कच्चा रपटा बने करीब 20 दिन हो चुके हैं, मगर अब तक भी अधिकारियों ने रपटे का निरीक्षण नहीं किया। दो दिन पहले ही 50 तीर्थयात्रियों से भरी रोडवेज बस रपटे से नीचे नदी में गिरने से बाल-बाल बची थी। ग्रामीणों ने रपटे पर नियमित पानी का छिड़काव कराने, पक्के रपटे का निर्माण कार्य जल्द शुरू कराने की मांग की।
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