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नवजातों को मिलेगी कंगारु मदर केयर की ममता

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नवजातों को मिलेगी कंगारू मदर केयर की ममता
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बिजनौर। जिलेवासियों के लिए एक अच्छी खबर है। समय से पहले जन्मे नवजातों की देखभाल के लिए जिला महिला अस्पताल में कंगारू मदर केयर यूनिट (केएमसीयू) की स्थापना की जाएगी। इसके अंतर्गत नवजात बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बच्चों की थेरेपी की जाएगी।
मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी को लेकर शासन गंभीर है। प्रसूता व नवजात को बेहतर सुविधा के लिए जिला महिला अस्पताल को और बेहतर बनाया जा रहा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए शासन ने जिला महिला अस्पताल में कंगारू मदर केयर यूनिट की स्थापना करने का फैसला किया है। चिकित्सकों के अनुसार वहां पर प्रतिमाह करीब 300 से अधिक डिलीवरी होती हैं। इसमें सामान्य और ऑपरेशन से प्रसव किए जाते हैं। हर साल 100 से अधिक ऐसे बच्चे पैदा होते हैं, जो समय से पहले पैदा होते हैं। ऐसे बच्चों को कंगारू मदर केयर थेरेपी की आवश्यकता होती है। यह नवजात नौ महीने के बजाए छह या सातवें महीने में पैदा होते हैं। समय से पहले जन्मे होने की वजह से ऐसे नवजातों की लंबाई बहुत कम होती है। औसतन वजन भी ढाई किलोग्राम की बजाए 1.80 से दो किलो तक होता है। चिकित्सकों की मानें तो समय से पहले जन्म लेने वाले नवजातों में रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम होती है। ऐसे में इन्हें आक्सोपॉक्सिया व हाइपोथर्मिया जैसी बीमारी होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। विशेष देखभाल न होने पर 40 दिन के भीतर बच्चों की मौत भी हो सकती है। ऐसे में बच्चों को अगर लगातार मां की त्वचा का स्पर्श मिलता है तो उनके रिकवर होने के चांस कई गुना बढ़ जाते हैं। ऐसे नवजातों को मां के साथ केएमसीयू में रखा जाएगा। यहां एक बार में कम से कम एक घंटा तथा एक दिन छह से आठ घंटे मां अपने नवजात को कंगारू थेरेपी दे सकती है। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस आभा वर्मा ने बताया कि कायाकल्प योजना के तहत अस्पताल की कायापलट हुई है। शासन के निर्देश पर अस्पताल में शिशु स्वागत केंद्र आदि की स्थापना कराई गई है। शासन ने अब कंगारू मदर केयर यूनिट (केएमसीयू) लगवाने के लिए प्रस्ताव मांगा है।
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क्या है मदर कंगारू केयर तकनीक
चिकित्सकों के अनुसार जैसे कंगारू जानवर अपनी थैली में अपने नवजात को रखकर उसे गर्मी देता है। उसी तरह मानव जीवन में नवजात शिशु व समय से पहले जन्मे शिशु के लिए कंगारू केयर तकनीक अपनाई जाती है। यह तकनीक नवजात शिशु के विकास में तो सहायक है ही। साथ ही मां के शरीर से लगातार घंटों चिपके रहने से शिशु इमोशनल व साइकोलॉजिकल भी सशक्त होता है।
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