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देश में नोटबंदी के बाद लागू जीएसटी से खादी ग्रामोद्योग धड़ाम

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धामपुर । जीएसटी लागू होने के बाद खादी के कारोबार में गिरावट आई है। खादी ग्रामोद्योग से जुडे़े कर्मचारी काम अपेक्षा से कम मिलने के कारण हाथ पर हाथ धरे बैठे है। गांव जैतरा में गांधी आश्रम खादी ग्रामोद्योग का केंद्रीय कार्यालय है। कार्यालय से देश के लगभग सभी प्रदेशों में खादी उत्पादों का आयात-निर्यात होता है। 2017-18 में कारोबार पिछले वर्षों की तुलना में अभी तक कम रहा है।
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धामपुर के गांव जैतरा में गांधी आश्रम खादी ग्रामोद्योग का केंद्रीय कार्यालय है। इस कार्यालय में गैर प्रदेशों से कच्चा और पक्का खादी का माल यहां पर आता है और फिर यहां से देश के कोनों कोनों में खुले गांधी आश्रम के भंडारों में बेच को जाता है। एक वक्त था जब यहां से प्रतिदिन कई कई ट्रकों से माल गैर प्रदेशों को जाता था, लेकिन वर्तमान हालात बद से बदतर हो गए है। अब सप्ताह में भी बड़ी मुश्किल से एक ट्रक माल भी निर्यात नहीं हो पा रहा है। केंद्रीय कार्यालय के सभी भंडार माल से अटे पड़े है। खादी की बाजार में मांग कम हो गई है। कें द्रीय कार्यालय के व्यवस्थापक तिलकराज के अनुसार वर्ष 2013-14 में खादी का कारोबार 12.50 करोड़ वार्षिक था। 2014-15 और 2015-16 में भी लगभग इसी के आसपास रहा, लेकिन जब केंद्र सरकार ने नोटबंदी की तो वर्ष 2016-17 में यह कारोबार घट कर दस करोड़ रह गया। 2017-18 में यह कारोबार अभी तक छह करोड़ भी पार नहीं कर सका है। नोटबंदी के बाद सरकार की ओर से खादी पर जीएसटी लागू कर दी गई। जबकि पहले कभी खादी पर कोई टैक्स नहीं होता था। जीएसटी लगने के बाद अब यदि ग्राहक एक हजार रुपये तक का माल खरीदता है तो उसे पांच प्रतिशत और एक हजार से अधिक का माल खरीदने पर 12 प्रतिशत जीएसटी देनी पड़ रही है। जीएसटी लागू होने के बाद ग्राहकों ने खादी के उत्पादों की ओर से मुंह मोड़ लिया है।

खादी की बिक्री पर ही नहीं, उत्पादन पर भी असर
अधिकारियों ने बताया कि ऐसा होने से खादी की बिक्री पर ही नहीं बल्कि उत्पादन पर भी बुरा असर पड़ता आ रहा है। वर्ष 2016-17 से पहले खादी का प्रोडक्शन करीब सवा चार करोड़ का था। जबकि नोटबंदी और जीएसटी के लागू होने के बाद तीन करोड़ का भी खादी का उत्पादन नहीं हो सका है।
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सुधार नहीं होने पर लोग भूल जाएंगे खादी : व्यवस्थापक
केंद्रीय कार्यालय के व्यवस्थापक तिलकराज ने कहा कि वास्तव में नोटबंदी के बाद लागू हुई जीएसटी ने खादी ग्रामोद्योग की रीढ़ को तोड़ डाला है। यदि सरकार से समय रहते, सुधार नहीं किया तो वास्तव में आम लोग खादी के उत्पादों को भूल जाएंगे।

काम न होने से छाई विरानी
खादी ग्रामोद्योग के केंद्रीय कर्मचारी मुनीश्वर ठाकुर, महेश कुमार , पारस नाथ शुक्ला, लक्ष्मण सिंह, महिपाल आदि का कहना है कि किसी समय जैतरा के इस केंद्रीय कार्यालय में 100 से ज्यादा कर्मचारी काम करते थे, लेकिन अब केवल 32 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। उनका वेतन भी समय से नहीं मिल रहा है।

मांग न होने से भविष्य चिंतित
अधिकारी बताते है कि अक्तूबर से जनवरी तक खादी का सीजन होता है। सीजन में सबसे ज्यादा खादी के उत्पादों की मांग उत्तराखंड में होती थी, लेकिन इस बार वहां पर भी नहीं है। गुजरात, बिहार, पंजाब, हरियाणा, बुंदेलखंड, मध्यप्रदेश, केरल, जम्मू, हिमाचल, पश्चिमी बंगाल, तमिलनाडू आदि प्रदेशों में भी खादी की मांग धड़ाम होने से इस कारोबार से जुडे़ लोग भविष्य को लेकर चिंतित है।
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