फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रात भर चला थाने में हंगामा, अफसरों के फूले रहे हाथ-पांव हंगामा 4

विज्ञापन
विज्ञापन
बिजनौर। जसवंत सिंह की मौत के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराने को लेकर शहर कोतवाली में रातभर ड्रामा चलता रहा। उत्तेजित भीड़ किसी कीमत पर भी बिना रिपोर्ट दर्ज हुए थाने से हटने को तैयार नहीं थी। भीड़ हंगामे के साथ नारेबाजी करती रही। भीड़ को देख अफसरों के हाथपांव फूले रहे। अफसर किसी तरह गले में फंसी फांस को निकालने में जुटे रहे। रिपोर्ट दर्ज होने पर भीड़ शांत जरूर हुई। दिन में भीड़ ने जाम लगाकर फिर अफसरों के चेहरे पर पसीना ला दिया।
विज्ञापन

जसवंत सिंह की मौत की खबर पर इलाके के आसपास के गांवों के लोगों ने शहर कोतवाली पर हल्लाबोल दिया। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर गांव वाले पुलिस व विधायक लोकेंद्र चौहान के खिलाफ नारेबाजी करते हुए थाने पहुंचे। पुलिस ने शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस लाने की कोशिश की तो भीड़ ने एंबुलेंस पर धावा बोल दिया। एंबुलेंस चालक एंबुलेंस लेकर भाग गया। भीड़ ने थाने पर धावा बोल दिया और वहां से नहीं हिली। भीड़ ने विधायक लोकेंद्र चौहान व पूर्व विधायक रुचिवीरा के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस के खिलाफ भी नारेबाजी होती रही। भीड़ में शामिल लोग रुचि वीरा के इशारे पर जसवंत सिंह का थाने में उत्पीड़न करने का आरोप लगाते रहे। कहा कि पुलिस प्रशासन अभी भी रुचि वीरा के दबाव में काम कर रहा है। जो रुचि वीरा चाहती है, जिले में वही हो रहा है। रुचि वीरा के कहने पर ही जसवंत सिंह को कई दिन तक पुलिस ने थाने में हिरासत में रखा। पुलिस की प्रताड़ना से ही जसवंत सिंह की मौत हुई है। भीड़ विधायक लोकेंद्र चौहान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग पर अड़ी रही। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद ये लोग शांत हुए। भीड़ के हंगामे के दौरान पुलिस अफसरों की सांसें फूली रहीं। अफसर इस उलझन में रहे कि कैसे इस बवाल से पीछा छूटे। लोकेंद्र चौहान, उनके भाई सीपी सिंह, पूर्व विधायक रुचि वीरा के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भीड़ शांत हो गई। अफसरों के आश्वासन पर शनिवार सुबह करीब पौने छह बजे भीड़ ने शव उठने दिया। आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर भीड़ फिर से भड़क गई। सुबह साढ़े दस बजे जसवंत सिंह के शव को नेशनल हाईवे पर रखकर जाम लगा दिया। भीड़ के का गुस्सा देखकर अफसरों के पसीने छूट गए। डीएम जगतराज व एसपी अतुल शर्मा खुद धरनास्थल पर जाकर बैठे, लेकिन भीड़ ने आरोपियों की गिरफ्तारी न होने तक जाम खोलने से मना कर दिया। इस पर डीएम व एसपी भारी पुलिस बल के साथ रुचि वीरा के कैंप कार्यालय पहुंचे, लेकिन रुचि वीरा नहीं मिलीं। पुलिस ने एक दो स्थानों पर और दबिश दी। जाम के दौरान भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत, सांसद भारतेंद्र सिंह, पूर्व सांसद मुंशीराम पाल, रालोद जिलाध्यक्ष अशोक चौधरी समेत तमाम नेता मौजूद रहे।
बेटे की खातिर पुलिस हिरासत में रहे जसवंत सिंह
जसवंत सिंह के परिजनों का कहना था कि पुलिस उनको थाने में बैठाकर बार-बार निपेेंद्र के बारे में मालूम कर रही थी। जसवंत सिंह के रिश्तेदारों ने बताया कि वे जसवंत सिंह से मिलने थाने में आए थे। उन्होंने जसवंत सिंह से कहा था कि उनको यहां से छुड़ा लेंगे, लेकिन जसवंत सिंह ने ऐसा करने से रोक दिया। जसवंत सिंह ने रिश्तेदारों से कहा कि अगर पुलिस निपेंद्र को पकड़ लेगी तो उसे थाने में लाकर प्रताड़ित करेगी। वे अपने बेटे को पुलिस की हिरासत में नहीं देख सकते हैं। पुलिस उनको चाहे जितने दिन थाने में बैठाकर रखे, लेकिन निपेंद्र के बारे में कुछ नहीं बताएंगे। रिश्तेदारों के अनुसार जसवंत सिंह थाने में एक ओर बैठे रहते, लेकिन पुलिस के मालूम करने पर कुछ भी नहीं बताते थे।
विज्ञापन

राज्यमंत्री की गाड़ी व विधायक पर हमले के आरोपी साकेंद्र चौधरी रात करीब 12 बजे समर्थकों के साथ थाने पहुंच गए थे। वे रात में समर्थकों के बीच थाने में रहे और धरना दिया। पर पुलिस ने उन्हें कुछ नहीं कहा। साकेंद्र चौधरी ने कहा कि विधायक लोकेंद्र चौहान रुचि वीरा के साथ मिलकर समाज की आवाज को दबा रहे हैं। साकेंद्र चौधरी करीब एक-दो घंटे तक थाने में रहे। रात में करीब दो बजे वे समर्थकों के साथ हंगामे के दौरान थाने से चले गए। सुबह को वे जाम व धरने में शामिल नहीं हुए। कोतवाली में हंगामे के दौरान भीड़ ने एसपी के खिलाफ भी नारेबाजी की। भीड़ केे गुस्से को देखते हुए एसपी अतुल शर्मा कोतवाली नहीं पहुंचे। तड़के करीब चार बजे एसएसपी मुरादाबाद डा.प्रीतेंद्र सिंह के साथ एसपी कोतवाली पहुंचे। उन्होंने गांव वालों को समझाकर शांत किया।
विधायक लोकेेद्र चौहान के भाई सीपी सिंह ने कहा कि वह तो नौ अगस्त को नृपेंद्र के कहने पर उनके पिता को छुड़वाने कोतवाली गए थे। उसी दिन शाम को एसपी से मिलकर जसवंत को छुड़ाने का अनुरोध किया था। जसवंत को उसी दिन नौ अगस्त की शाम को नृपेंद्र को सौंप दिया था। उनका इस प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें